कैलाश शर्मा की कलम से

कैलाश शर्मा की कलम से…

हम ही मालिक,
हम ही लिखते है ,
हम ही लिखवाते है,
ओर अब हम ही बेचेंगे….?

भंडार से भरेंगे ,भंडारे….?

दोस्तों बड़े दिनों के बाद आज आपसे गुफ्तगू करने को मिला है,मिलना भी जरूरी था मुद्दा ही कुछ ऐसा हो गया कि जंग लगी कलम से जंग हटाना ही पड़ा….

आइए इस पर करते है हम थोड़ी बहुत चर्चा..

मुद्दा ये है कि इन दिनों ब्यावर के राजकीय अमृतकौर हॉस्पिटल में बहुत कुछ और बरसो से चल रहा है,मेरी कलम भी बंद बक्शे में पड़ी थी और कान में रुई भी कुछ वर्षों से मैंने डाल रखी थी ,अब आवाजे इतनी तेज हो गई कि कान से रुई निकालनी पड़ी..
ब्यावर राजकीय अमृतकौर हॉस्पिटल के सबसे बड़े चिकित्सक की एक दवा कंपनी है अब वो ये कहेंगे कि मेरी कंपनी नही है ,पर कैलाश शर्मा बिना सबूत कुछ नही लिखता है,साहब कब तक हिस्सेदार थे कब कंपनी से रिटायर हुए सब सबूत है इस पर फिर कभी ओर चर्चा करेंगे…वरना आज की गुफ्तगू का स्वाद बिगड़ जाएगा…?

खेर छोड़ो बात आज के मुद्दे की करते है ,साहब कंपनी की दवा वो स्वयं लिखते है बुलेट ट्रेन की स्पीड से ओर दूसरे डॉक्टर से भी लिखवाते है वो भी दबाव में,अब ये मत पूछना की मुझे किसने कहा ये जग जाहिर है साहब बड़े डॉक्टर है इसलिए छोटे डॉक्टर की क्या औकात की बड़े साहब की बात ना माने,मजबुरी है,मुझे मेरे सूत्रों ने ये बताया कि अब बड़े डॉक्टर साहब के मुँह से बी एन के सहकारी होलसेल उपभोक्ता भण्डार के मेडिकल काउंटर नो 3 को लेके लार टपक रही है,भंडार पर साहब की कंपनी की दवाइया भी बुलेट ट्रेन की स्पीड से बिकती है,अरे भाई बिकेगी भी क्यों नही हम लिखते है हम लिखवाते है..

अब साहब के मन मे लडू ये फुट रहा है की जब लिखते हम है लिखवाते हम है तो क्यों ना हम ही बेचे ,कहानी कुछ समझ आई होगी..अब आगे चलते है…..साहब अपने रिश्तेदार फार्मासिस्ट के लिए मेडिकल काउंटर लेने के लिए जुगाड़ में लगे है,

पूर्व में कार्यरत कर्मचारी भी साहब का दोस्त ही है सुना है,पर खुद के फायदे के लिए कौन दोस्त…उसके पिछवाड़े में लात मरवाकर मेडिकल काउंटर लेने के साहब सपने देख रहे है…..

सपने देखने भी चाहिए,सपने बिना देखे पुरे नही होते,सपने देखना कोई गुनाह थोड़ी है ,ओर गुनाह हो भी तो क्या साहब का साहब कौन…?अब खर्चे इतने बढ़ गए है कि तनख्वाह से काम नही चल पाता है ,ओर बच्चों को पढ़ाने में भी मोटा पैसा लगता है तो क्या करे कुछ एक्स्ट्रा व्यापार तो कर ही सकते है इसमें क्या बुराई है..?जिसको बुराई नजर आए काला चश्मा लगा लो,धूप बहुत तेज है…

अब अमृतकौर अस्पताल से खुद ओर जितने भी डॉक्टर साहब की कंपनी की दवाइयां लिखते है शायद उस से खर्चा नही चल पाता है तो क्या करे कुछ तो करना पड़ेगा..ओर करना भी चाहिए,इंसान कर्म करेगा तभी तो फल मिलेगा और साहब के कर्म बहुत अच्छे है हॉस्पिटल का पत्ता पत्ता ,हर एक कर्मचारी साहब को दिल से दुआ देता है….

तो हमने सपना देखा भंडार का मेडिकल काउंटर लेने का ,फिर वही बात मैं नही ले रहा भंडार का मेडिकल काउंटर वो तो रिश्तेदार है,ये भी सही है साहब तो वही है ,जो रिश्तेदारों के भविष्य की भी फिक्र करके चले, बड़े दयालु है साहब रिश्तेदार का भी भला सोच रहे है,कोई गुनाह तो नही किया ना,बता देना गुनाह होतो..

इसलिए मैंने लिखा कि भंडार से भंडारे भरने की तैयारी…
दोस्तो आज इतना ही मिलेंगे अगले लेख के साथ जल्द,एक नए फ्लेवर के साथ,पढ़ते रहिये चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र का नंबर वन समाचार पत्र मेडिकेयर न्यूज़

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कैलाश शर्मा
मेडिकेयर न्यूज़
राजस्थान ब्यूरो चीफ
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