पतंजलि से सुप्रीम कोर्ट ने किया सवाल तो वकीलों के पास नहीं मिला जवाब

नई दिल्ली। पतंजलि को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किए कि वह इस बात का सबूत दे कि प्रतिबंधित वस्तुएं नहीं बेची जा रही हैं। बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के भ्रामक विज्ञापन के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट को पतंजलि आयुर्वेद ने बताया कि उसने उन 14 उत्पादों की बिक्री रोक दी है, जिनके निर्माण लाइसेंस उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने अप्रैल में सस्पेंड कर दिए थे।

मामले की सुनवाई जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने की। पीठ को पतंजलि आयुर्वेद ने बताया कि उसने 5,606 फ्रेंचाइजी स्टोर को इन उत्पादों को वापस लेने का निर्देश दिया है।

पतंजलि आयुर्वेद ने दी सफाई

पतंजलि आयुर्वेद ने कहा कि मीडिया मंचों को भी इन 14 उत्पादों के सभी विज्ञापन वापस लेने का निर्देश दिया है। इस पर जस्टिस कोहली ने पूछा कि क्या आपने सोशल मीडिया इंटरमीडियरी से इसे हटाने को कहा और क्या आपके सभी विज्ञापन हट गए हैं। पतंजलि के वकील ने कहा कि सभी मीडिया को निर्देश भेज दिया है कि वे हमारे विज्ञापन न दिखाएं।
जस्टिस कोहली ने पूछा कि आपने तो उनसे अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने क्या वे सारे विज्ञापन हटा दिए है? आपके पास कुछ सबूत हैं?

जस्टिस कोहली के इन सवालों का पतंजलि के वकील बगलें झांकने लगे। तब जस्टिस कोहली ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी और पतंजलि आयुर्वेद को दो हफ्ते के भीतर एक हलफनामा दायर कर यह बताने का निर्देश दिया कि क्या विज्ञापन हटाने के लिए सोशल मीडिया मंचों से किए गए अनुरोध पर अमल किया गया है। क्या इन 14 उत्पादों के विज्ञापन वापस ले लिए गए हैं। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तारीख तय की।

यह है मामला

पतंजलि

सुप्रीम कोर्ट भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें पतंजलि पर कोविड टीकाकरण अभियान और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाया गया है।

उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने न्यायालय को बताया था कि पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और दिव्य फार्मेसी के 14 उत्पादों के निर्माण लाइसेंस को ‘तत्काल प्रभाव से निलंबित’ कर दिया है। सर्वोच्च अदालत ने भ्रामक विज्ञापन मामले में योग गुरु रामदेव, उनके सहयोगी बालकृष्ण और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को जारी अवमानना नोटिस पर 14 मई को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।