भारत में हर साल 20 हजार लोगों को पेसमेकर का सहारा – डॉ.भामरी

92 फीसदी लोगों की अस्पताल पहुंचने से पहले हो जाती है मौत
पानीपत
हमारे देश में सडन डेथ, मौत के सबसे सामान्य कारणों में से एक है। ताजा अध्ययनों से पता चला है कि सभी हृदय रोगों में से 60 फीसदी हृदय रोग एरिथमिया के कारण सडन कार्डियेक अरेस्ट के कारण होता है। यदि पेसमेकर (आईसीडी) सही समय पर प्रत्यारोपित किया जाये तो सडन डेथ को रोका जा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आज यहां आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, शालीमार बाग, नई दिल्ली मेंकार्डियोलॉजी विभाग के सहायक निदेशक डॉ. नवीन भामरी तथा कार्डियोलॉजी में कंसल्टेंट डॉ. देवेंद्र कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। डॉ.भामरी ने कहा कि दुनिया भर में हर साल 10-20 लाख व्यक्तियों की मौत पेसमेकर की सुविधा नहीं मिलने के कारण हो जाती है। भारत में, हर साल करीब 100,000 रोगी ब्रैडिकार्डिया (धीमी हार्ट बीट) से ग्रस्त होते हैं,लेकिन केवल 20,000 रोगियों को ही पेसमेकर का सहारा मिलता है। उन्होंने बताया कि पेसमेकर एक छोटा सा उपकरण है जिससे दिल की असामान्य धड़कन को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए मरीज की छाती या पेट की त्वचा के नीचे प्रत्यारोपित किया जाता है। शुरू में पेसमेकर का विकास हृदय की कम धड़कन वाले रोगियों को इलैक्ट्रिक पल्स देकर उनके हृदय की धड़कन को सामान्य रखने के लिए किया गया लेकिन आज, पेसमेकर चिकित्सा एरिथमिया या दिल की धड़कन से संबंधित सभी बीमारियों के इलाज का पर्याय बन गया है।
इस अवसर पर बोलते हुए डॉ.देवेंद्र अग्रवाल ने कहा कि एक अनुमान के अनुसार सडन कार्डियेक अरेस्ट से पीडि़त करीब 92 प्रतिशत लोगों की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो जाती है। पेसमेकर प्रौद्योगिकी ने लाखों रोगियों के जीवन को बढ़ा दिया है। इस अवसर पर मैक्स अस्पताल के ऑपरेशन्स उपाध्यक्ष डॉ.अमरदीप कोहली ने कहा कि भारत में हर दस लाख लोगों में से केवल आठ से नौ पेसमेकर प्रत्यारोपित करते हैं। प्रति 10 लाख लोगों में इतने कम लोगों में पेसमेकर प्रत्यारोपित किये जाने के कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण लोगों में कम जागरूकता, इसका खर्च वहन करने में असमर्थ होना, एडवांस कार्डियक केन्द्रों की कमी, गुणवत्ता पूर्ण जीवन के प्रति उदासीन होना, भारत में बीमा प्रणाली के तहत कम कवर होना है।
हृदय के इन 11 लक्षणों की अनदेखी नहीं करें
सीने में तकलीफ – आपके सीने में दर्द,
जकडऩ, या दबाव मतली, अपच, सीने में जलन, पेट दर्द जो हाथ तक फैलता हो
चक्कर आना या रक्तचाप में अचानक गिरावट
आपकी छाती के बीच में दर्द या दबाव जो आपके गले या जबड़े तक फैलता हो
तेज चलने या सीढिय़ां चढऩे पर सांस का फूलना
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के कारण अत्यधिक खर्राटे
किसी कारण के बगैर पसीना आना
दिल की धड़कन का अनियमित होना
सफेद और गुलाबी बलगम के साथ लंबे समय से खांसी
पैर, पांव और एडिय़ों में सूजन
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