आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में नकली दवाओं के बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है। शहर के मलपुरा इलाके में छापेमारी के दौरान देश-विदेश की पांच नामी दवा कंपनियों के नाम वाली 14 तरह की दवाएं जब्त की गई हैं, जिनके नकली होने का संदेह है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये दवाएं पुडुचेरी में बनवाकर यहां एक गोदाम में छिपाई गई थीं।

किन कंपनियों के नाम पर बिक रही थीं दवाएं

औषधि विभाग के अनुसार जब्त दवाएं सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज, एस्ट्राजेनेका, सनोफी और टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स जैसी बड़ी कंपनियों के ब्रांड नाम से पैक की गई थीं। जब्त माल में कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, एलर्जी और दर्द की दवाएं शामिल हैं। इनमें रोसुवास 20 और 40, एलेग्रा और एलेग्रा एम, एमारिल 1, 2 और एम, लोसर 50 और लोसर एच, जलरा एम, कार्डेस 2.5 तथा केटोरोल डीटी जैसे ब्रांड शामिल हैं।

ये वे दवाएं हैं जिन्हें लाखों मरीज रोजाना लेते हैं। ऐसे में नकली दवा का बाजार में पहुंचना मरीजों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

14 नमूने जांच के लिए भेजे गए

औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्रा ने बताया कि गोदाम में मिली सभी दवाओं की बैच संख्या, निर्माता कंपनी और कीमत की पूरी सूची तैयार की गई है। हर तरह की दवा का एक नमूना, यानी कुल 14 नमूने, प्रयोगशाला जांच के लिए लिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि दवाओं में कितनी मिलावट है।

मामले की जानकारी उत्तर प्रदेश की खाद्य सुरक्षा एवं औषधि आयुक्त डॉ. रोशन जैकब को भी दी गई है। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली।

कंपनियों को नोटिस, पुडुचेरी कनेक्शन की जांच

विभाग ने संबंधित दवा कंपनियों को नोटिस भेजकर पूछा है कि जब्त की गई दवाएं उनके संयंत्रों में बनी हैं या नहीं। शुरुआती जांच में इन दवाओं के तार वर्ष 2025 में सामने आए नकली दवा मामले से जुड़े बताए जा रहे हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, नामी कंपनियों के ब्रांड वाली नकली दवाएं पुडुचेरी में बनवाकर कई राज्यों में खपाई जाती रही हैं। इस नेटवर्क से जुड़े दवा माफिया ए.के. राजा समेत कई लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि आगरा का गोदाम इस नेटवर्क की किस कड़ी से जुड़ा है और यहां से दवाएं किन-किन जिलों में भेजी जा रही थीं।

नकली दवाओं से कैसे बचें

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को सलाह देते हैं कि दवाएं हमेशा लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर से ही खरीदें और पक्का बिल जरूर लें। दवा के पैक पर बैच नंबर, निर्माण और समाप्ति तिथि ध्यान से जांचें। देश में बिकने वाले कई बड़े ब्रांडों के पैक पर अब क्यूआर कोड भी होता है, जिसे स्कैन करके दवा की असलियत जांची जा सकती है। अगर किसी दवा का पैक, रंग या असर संदिग्ध लगे, तो इसकी शिकायत तुरंत अपने जिले के औषधि निरीक्षक से करें।

आगरा की यह कार्रवाई एक बार फिर दिखाती है कि नकली दवाओं के खिलाफ लगातार निगरानी कितनी जरूरी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में और खुलासे होने की उम्मीद है।

स्रोत: अमर उजाला (1 अक्टूबर 2026)