नई दिल्ली: इलाज में देरी को लेकर दिल्ली के एक उपभोक्ता आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने एक कैंसर पीड़ित महिला के इलाज में मेडिकल लापरवाही का दोषी पाते हुए एक निजी अस्पताल और दो डॉक्टरों को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला एक ऐसी महिला मरीज के इलाज से जुड़ा है, जो एडवांस ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित थीं और उन्हें ब्रेन मेटास्टेसिस (कैंसर का मस्तिष्क तक फैलना) की समस्या भी थी। इसी दौरान उन्हें पित्ताशय (गॉलब्लैडर) में गंभीर संक्रमण हो गया।
आयोग की सुनवाई में सामने आया कि डॉक्टरों ने गॉलब्लैडर के संक्रमण के इलाज में करीब आठ दिनों की देरी की। इस देरी के कारण मरीज की हालत लगातार बिगड़ती गई। जांच में पता चला कि इलाज में देरी की वजह से मरीज का गॉलब्लैडर गैंग्रीन से ग्रस्त हो गया और उसमें छेद हो गए। बाद में इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई।
आयोग ने माना- सीधी लापरवाही
उपभोक्ता आयोग ने इसे सीधे तौर पर मेडिकल लापरवाही माना और अस्पताल तथा दोनों डॉक्टरों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। आयोग ने परिवार को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
गंभीर मरीज में भी समय पर इलाज जरूरी
यह फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि मरीज पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा हो, तब भी उसकी हर नई समस्या का समय पर और सही इलाज करना डॉक्टरों और अस्पताल की जिम्मेदारी है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, गॉलब्लैडर के गंभीर संक्रमण में देरी होने पर संक्रमण पूरे शरीर में फैल सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
मरीजों के पास क्या हैं अधिकार
उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत अस्पताल और डॉक्टरों की सेवाएं भी ‘सेवा’ की श्रेणी में आती हैं। इसलिए इलाज में लापरवाही होने पर मरीज या उनके परिजन उपभोक्ता आयोग में शिकायत कर सकते हैं।
- जिला उपभोक्ता आयोग: 50 लाख रुपये तक के दावों के लिए
- राज्य उपभोक्ता आयोग: 50 लाख से 2 करोड़ रुपये तक के दावों के लिए
- राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग: 2 करोड़ रुपये से अधिक के दावों के लिए
शिकायत करते समय इलाज से जुड़े सभी दस्तावेज जैसे पर्चे, जांच रिपोर्ट, अस्पताल के बिल, डिस्चार्ज समरी और बेड हेड टिकट (बीएचटी) की प्रतियां अपने पास रखना बेहद जरूरी है। मरीज या परिजन अस्पताल से अपने मेडिकल रिकॉर्ड की प्रति मांगने का अधिकार भी रखते हैं।
अस्पतालों के लिए संदेश
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे फैसले अस्पतालों को इलाज के हर चरण में सतर्कता बरतने और मरीज की स्थिति की लगातार निगरानी के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही, ये मरीजों का स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
स्रोत: न्यूज मोबाइल हिंदी (1 अक्टूबर 2026)










