कोरबा (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने आंतरिक जांच कमेटी गठित कर दी है, जबकि अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को निराधार बताया है।
परिजनों का आरोप: सिजेरियन की मांग अनसुनी
परिजनों का कहना है कि उन्होंने महिला की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों से सिजेरियन (ऑपरेशन से) प्रसव कराने का अनुरोध किया था, लेकिन डॉक्टर सामान्य प्रसव का इंतजार करने पर अड़े रहे। परिजनों के अनुसार, समय पर ऑपरेशन किया जाता तो मां और बच्चे दोनों की जान बच सकती थी।
अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को किया खारिज
अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। प्रबंधन के अनुसार, महिला को तीन दिनों तक उचित चिकित्सकीय देखरेख में रखा गया था और डॉक्टर नियमित रूप से राउंड ले रहे थे। प्रसूता के गर्भाशय का मुंह नहीं खुला था, इसलिए सामान्य प्रसव की संभावना को देखते हुए उसे निगरानी में रखा गया था।
प्रबंधन ने बताया कि सोमवार सुबह महिला को अचानक घबराहट और दिल की धड़कन तेज होने (पल्पिटेशन) की शिकायत हुई, जिससे उसकी हालत तेजी से बिगड़ी। उसे लेबर रूम में शिफ्ट किया गया, लेकिन तब तक गर्भस्थ शिशु की धड़कन बंद हो चुकी थी। प्रबंधन का कहना है कि ऐसी स्थिति में सिजेरियन करने का कोई चिकित्सकीय औचित्य नहीं था।
प्रशासनिक और पुलिस जांच शुरू
घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल चौकी पुलिस और कार्यपालिक दंडाधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस की मौजूदगी में पंचनामा और अन्य कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया। मेडिकल कॉलेज की आंतरिक जांच कमेटी पूरे मामले की पड़ताल करेगी। पोस्टमॉर्टम और जांच रिपोर्ट से ही मौत की असली वजह और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।
गर्भावस्था में खतरे के संकेत पहचानें
स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था के अंतिम दिनों में कुछ लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अचानक सांस फूलना, सीने में दर्द या घबराहट, तेज सिरदर्द, धुंधला दिखना, अत्यधिक रक्तस्राव, शिशु की हलचल कम या बंद होना और हाथ-पैर व चेहरे पर अचानक सूजन जैसे लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर को बताना चाहिए।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच कराएं और प्रसव के लिए हमेशा ऐसे अस्पताल का चुनाव करें, जहां आपात स्थिति में ऑपरेशन, खून चढ़ाने और नवजात देखभाल की सुविधा उपलब्ध हो। मातृ मृत्यु के मामलों में हर मौत की गहन समीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बेहद जरूरी है।
स्रोत: ईटीवी भारत (1 अक्टूबर 2026)










