स्वास्थ्य अधिकारियों के आंचल में फल-फूल रहे झोलाछाप डॉक्टर

  • स्पेशल ब्रांच के एडीजी का खुलासा
  • सभी से लोकल स्वास्थ्य अधिकारियों की गर्म होती है जेब
  •  झोलाछाप के कारण एक मरीज का पैर काटना पड़ा 
रांची (झारखंड):  राज्य में झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम अपनी दुकानें चला रहे हैं। इनके चक्कर में फंसकर हर दिन किसी किसी मरीज को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक राज्य में करीब दो हजार से भी अधिक झोलाछाप डॉक्टर अपनी दुकान चला रहे हैं। राज्य में प्रशासनिक और स्वास्थ्य अधिकारियों की मिलीभगत से फलफूल रहे इन झोलाछाप डॉक्टरों के संबंध में राज्य के स्पेशल ब्रांच के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) ने अपनी रिपोर्ट राज्य के डीजीपी को सौंपी है। इसमें उन्होंने पूरी स्थिति को भयावह बताते हुए इन झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाकर एफआईआर दर्ज करने की बात कही है। उन्होंने झोलाछाप डॉक्टरों के संंबंध में कई खुलासे किए हैं।
मुहिम चलाकर प्राथमिकी दर्ज करें 
एडीजी ने कहा है कि अगर समय रहते इसे गंभीरता से नहीं लिया गया तो कितने ही ग्रामीणों की गलत इलाज से जान जा सकती है। हर जिले में अवैध नर्सिंग होम चलाने वाले झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ मुहिम चलाकर बंद कराने एवं इन पर प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता है। हालांकि बार-बार कार्रवाई होती हैं, फिर भी उचित परिणाम मिलना चिंताजनक है।
बिना लाइसेंस के रखते हैं दवाओं का स्टॉक 
झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा बिना ड्रग लाइसेंस के दवाओं का भंडारण विक्रय भी किया जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई नहीं करता। इन डॉक्टरों की कमाई मौसमी बीमारियों के फैलने से अधिक होती है। मरीज चाहे उल्टी, दस्त, खांसी, बुखार से पीडि़त हो या फिर अन्य कोई बीमारी से। सभी बीमारियों का इलाज यह झोलाछाप डॉक्टर करने को तैयार हो जाते हैं। उल्टी, दस्त, बुखार जैसी बिमारियों में वे ग्लूकोज की बोतलें चढ़ाना शुरू कर देते हैं।
एडीजी ने अपनी रिपोर्ट में एक घटना का भी जिक्र किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि चतरा के गिद्धौर प्रखंड मुख्यालय चौक पर इसी प्रकार का एक झोलाछाप डॉक्टर, जिसका नाम संजय दांगी है, के द्वारा श्रीराम सेवा सदन नर्सिंग होम चलाया जा रहा है। इसमें कितने ही भोले-भाले ग्रामीणों की जिंदगी बर्बाद हो चुकी है।  सूचना यह भी मिली है कि इस नर्सिंग होम में तीन-चार गर्भवती महिलाओं एवं छह-सात बच्चों की मौत भी हो चुकी है।
रिपोर्ट में एडीजी ने कहा है कि पूरे मामले में चौंकाने वाली बात है कि ये नर्सिंग होम और क्लिनिक चौक-चौराहों पर चल रहे हैं, जहां से तमाम अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है। इसके बाद भी इस ओर पदाधिकारी नजर नहीं उठाना चाहते। ये झोलाछाप डॉक्टर अपने नर्सिंग होम के नजदीक एमबीबीएस का बोर्ड लगाकर गलत ढंग से स्वयं एमबीबीएस डॉक्टर का रोल अदा कर रहे हैं।
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