एक्सरे किरणों से गर्भ में बच्चा हो सकता है दिल का रोगी

आधुनिक होते भारत में तकनीक के जितने फायदे सामने आ रहे हैं, उतने ही नुकसान भी देखने को मिल रहे हैं। डॉक्टरों के क्लीनिकों पर बच्चे और युवाओं की ऐसी भीड़ दिनों-दिन बढ़ रही है, जिनमें बीमारियों के नए-नए लक्षण मिल रहे हैं। जांच में इन नई बीमारियों का जन्म रेडिएशन पाया गया है। कंप्युटर, मोबाइल की लत  जान की दुश्मन बन रही हैं।

चंडीगढ़: दिल में छेद लेकर पैदा होने वाले बच्चों को ऐसी गंभीर बीमारी क्यों होती है इसके रहस्यों पर पर्दा उठने लगा है। पांच फीसदी मामलों में यह बीमारी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाती है तो पांच फीसदी मामलों में गर्भवती महिला द्वारा एक्सरे करवाने या ज्यादा दवाइयां खाने के कारण बच्चे के दिल में छेद रह जाता है।
दिल की बीमारियों पर फिजिशियंस फोरम ने एक सीएमई कराई। इसमें देश के दिग्गज कार्डियोलॉजिस्ट शामिल हुए। बच्चों की दिल की बीमारियों के एक्सपर्ट दिल्ली से डॉ. एस. राधाकृष्णन ने बताया कि एक हजार बच्चों के पीछे 8 से 10 बच्चों में दिल में छेद होता है। कई मामलों में एक दिन के बच्चे के दिल का आप्रेशन करना पड़ जाता है। आजकल ज्यादातर बच्चे फिजिकल एक्सरसाइज कम करने लगे हंै। इस कारण कम उम्र में मोटापा और दिल की बीमारियां घेर लेती हैं। बच्चों को मोबाइल के ज्यादा प्रयोग और फास्टफूड से दूर रखना बेहद जरूरी है।
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार सरकार दिल की ब्लॉकेज दूर करने वाले स्टेंट की कीमत 40-45 हजार तक कंट्रोल करने पर विचार कर रही है। बीड़ी-सिगरेट और तंबाकू का सेवन करने वालों को हार्ट अटैक का खतरा आम व्यक्ति से कई गुणा ज्यादा माना गया है।
तंबाकू में पाया जाने वाला निकोटिन जानलेवा होता है और दिल की नाडिय़ों में रिएक्शन करता है। रिएक्शन से नाडिय़ों में कण जमा होने लगते हैं जो बाद में हार्ट अटैक का कारण बनते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि दिल के रोगों से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि अपने रूटीन को नियमित करें। फास्टफूड, ज्यादा तली चीजों से परहेज करें और नियमित तौर पर व्यायाम की आदत डालें।