दवा बाजार पर अमेरिकी कॉरपोरेट का कब्जा, फार्मा सॉफ्टवेयर खोलेगा ‘राज’

ई-फार्मेसी का हो रहा बेस तैयार, नहीं दिखेगी गली-मोहल्ले के नुक्कड़ पर केमिस्ट शॉप

नई दिल्ली: आने वाले दिनों में यदि गली-मोहल्ले के नुक्कड़ में खुली दवा दूकान पर हमेशा के लिए ताला लटक जाए, तो हैरान न हो, क्योंकि ई-फार्मेसी को भारत में लागू करने के लिए अमेरिकी फार्मा कॉरपोरेट ने दवा क्षेत्र में काम कर रही सॉफ्टवेयर कंपनियों को ‘कैप्चर’ कर जमीनी मार करने की तैयारी कर ली है। जानकारों की मानें तो अमेरिका की एक बड़ी फार्मा कंपनी ने ई-फार्मेसी की तमाम फॉर्मेलिटी पूरी कर काम शुरू कर दिया है। अब केमिस्ट शॉप केवल वहां नजर आएंगी, जहां डॉक्टर बैठेगा। यानी अस्पताल, क्लीनिक, नर्सिंग होम में ही रिटेल दवा दुकान खोलने की अनुमति होगी। अभी सारा काम अंदरखाने हो रहा है, जिस दिन सब कुछ सामने आएगा, तब नोटबंदी की ही तरह इसको लेकर ‘हाहाकार’ मचना लाजिमी है। ऐसा होने से सीएंडएफ, डिस्टीब्यूटर, स्टॉकिस्ट/होलसेलर और रिटेल दवा विक्रेता की चेन टूट जाएगी। देश में काम कर रही केमिस्ट एसोसिएशन एवं अन्य दवा व्यापारी संगठनों का अस्तित्व भी गुम हो जाएगा। ड्रग डिपार्टमेंट में फैले भ्रष्टाचार पर भी खुद-ब-खुद बहुत हद तक अंकुश लगेगा।
भारतीय दवा बाजार में ई-फार्मेसी का कारोबार करने वाले अमेरिकी फार्मा कॉरपोरेट्स की साफ्टवेयर कंपनियों पर नजर का खुलसा करते हुए जानकारों ने बताया कि किसी मरीज को क्या बीमारी है और वह कौनसी दवा खा रहा है, डॉक्टर किसी मरीज को कौन-सी कंपनी की दवा लिख रहे हैं, कहां किस दवा की खपत ज्यादा है, कौन-सी कंपनी की दवा का क्या मूल्य है और वह कितने की बिक रही है, ये सब डाटा उन्हें बैठे-बैठे मिल जाएगा, जिससे वह देश के आखिरी छोर तक अपने मंसूबे पूरे करने में सफल हो जाएंगे। इस आहट ने भारतीय  दवा बाजार की नींद उड़ा दी है।
ई-फार्मेसी के जरिये भारतीय फार्मा बाजार पर एकाधिकार करने वाले अमेरिकी फार्मा कॉरपोरेट्स को अब तक मार्केट का वो तजुर्बा नहीं हो पा रहा था, जो क्षेत्र के लोकल दवा व्यवसायी को होता है। जैसे किस क्षेत्र में किस साल्ट या कंपनी के उत्पादों की ज्यादा खपत है, लोकल मार्किट को समझ पाने में कठिनाई आ रही थी। इस जानकारी के आभाव में अधिकतर कॉर्पोरेट या तो नुकसान में चल रहे हैं या बंद होने के कगार पर हैं। सॉफ्टवेयर कंपनी के साथ करार से इस धंधे के फार्मा क्षेत्र में दूरगामी प्रभाव खतरनाक साबित हो सकते हैं।
देखें, क्या-क्या है फार्मा सॉफ्टवेयर के भीतर
होलसेल व्यवसाय की बात करें तो किस केमिस्ट की क्या परचेज है, कितना डिस्काउंट केमिस्ट को मिलता है, केमिस्ट की पेमेंट हिस्ट्री क्या है, क्या वह सही समय पर पेमेंट करता है या नहीं, होलसेलर की गवर्नमेंट और हॉस्पिटल सप्लाई कहां-कहां है, किस रेट और किस स्कीम से किसको क्या सप्लाई करता है, बैलेंसशीट क्या कहती है, कैश और फंड फ्लो क्या है आदि सब एक क्लिक पर उन्हें उपलब्ध हो जाएगा। डॉक्टर-मरीज-केमिस्ट की ‘सेवा’ का यह गहरा राज बेपरदा हो जाएगा।
भारत के दवा व्यापार में अग्रणी सॉफ्टवेयर कंपनी मार्ग के सीएमडी ठाकुर अनूप सिंह ने फार्मा कॉरपोरेट की इस चाल के दूरगामी खतरे होने की बात पर सहमति जताई है। उन्होंने माना कि दवा क्षेत्र के बड़े अमेरिकी कॉरपोरेट लोकल सॉफ्टवेयर कंपनियों को खरीद कर डाटा एनालिसिस कर छोटे दवा व्यवसाय को खत्म कर देेंगे। डाटा प्रयोग कर किसी भी मार्केट पर कब्जा किया जा सकता है। इससे भारत में भी अमरीका की तर्ज पर गिने चुने 2-3 फार्मेसी चेन रह जाएंगे और लाखों की तादाद में फैला यह व्यवसाय चंद हाथों में सिमट जाएगा।
नेशनल सॉफ्टवेयर खरीदें 
मार्ग सॉफ्टवेयर के सीएमडी के मुताबिक, डाटा सिक्योर रहे, इसके लिए जरूरी है कि नेशनल वजूद रखने वाली कंपनी का ही सॉफ्टवेयर खरीदना चाहिए। छोटी-मोटी सॉफ्टवेयर कंपनियों को कोई भी कॉर्पोरेट लालच देकर आसानी से खरीद कर आपका डाटा हासिल कर सकती हैं। ग्राहक को अच्छी, ईमानदार और सुलभ सेवा देकर इन बड़े कॉरपोरेट से लड़ा जा सकता है।