दिव्यांग मेडिसिन बाबा बने फरिश्ते

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में 2008 में हुए लक्ष्मीनगर के मेट्रो हादसे ने एक वयोवृद्ध व्यक्ति के जीवन का मकसद ही बदल डाला। तब से ही ओमकार नाथ शर्मा जरूरतमंद लोगों को मुफ्त जीवनदायिनी दवा बांट रहे हैं। वह पैरों से 40 फीसद दिव्यांग हैं, फिर भी रोजाना बसों में कई किलोमीटर का सफर करते हैं और पांच किलोमीटर पैदल चलकर दवा मांगते हैं, ताकि दवा की कमी में कोई दम न तोड़े। उन्हें लोग मेडिसिन बाबा के नाम से पुकारने लगे । उनका कहना है कि मेट्रो हादसे के बाद कई लोगों को दवा की कमी में तड़पते देखा। उस घटना ने अंदर तक झकझोर दिया। शुरू में जो दवा मिलती, उसे राम मनोहर लोहिया व अन्य अस्पतालों मों गरीबों को बांट आते थे। फिर किसी के टोकने पर दवाइयां चैरिटेबल ट्रस्ट और अस्पतालों में देनी शुरू कर दी। लोगों ने आर्थिक मदद भी की तो दवाएं भी बढ़ीं।
 किराये का एक बड़ा घर लेकर एक हिस्से में आशियाना और दूसरे हिस्से में दवाखाना बनाकर एक फार्मासिस्ट रख लिया। जरूरतमंदों को इस दवाखाने से दवाएं तो मिलती ही हैं, साथ ही अगर कोई चिकित्सक या अस्पताल गरीबों के लिए दवा या जीवन रक्षक उपकरण मांगते हैं तो उन्हें उपलब्ध कराया जाता है। पहले दवाओं का टोटा होता था, अब लाखों रुपये की दवाएं उलब्ध हैं। बहुत से लोग खुद दवा पहुंचाने आते हैं। किसी गरीब मरीज की किडनी फेल है या कैंसर पीडि़त है तो बाबा अपने पास से दवाएं खरीदकर भी देते हैं। हर महीने 40 हजार से ज्यादा की दवा खरीदते हैं। बाबा कहते हैं कि दवाइयों की कीमत बाजार में बहुत ज्यादा है। कई परिवार दवा खरीदने में ही तबाह हो जाते हैं। ऐसे में जेनेरिक दवाओं के प्रचलन को बढ़ाना जरूरी है।
 
विदेशों से भी आ रहीं दवाएं
मेडिसन बाबा के इस कार्य से प्रेरित होकर देश-विदेश से लोग दवाइयों के पार्सल भी भेजते हैं। लेकिन अभी भी लोगों को जागरूक करने के लिए वे दवा मांगते हैं कि घर में बची हुई दवा फेंकें नहीं, इसे किसी जरूरतमंद तक पहुंचाया जाए। वह रोजाना सुबह 10 बजे घर से निकलते हैं। वे वही दवाएं लेते हैं जिनकी एक्सपायरी डेट कई महीने बची हो। शुरुआत में उनके परिवार ने भी उनका विरोध किया, लेकिन गरीबों की मुस्कराहट को देख अब परिवार भी सहयोग कर रहा है। उनका बेटा इस कार्य से जुड़ गया है।
झोली में ढेरों पुरस्कार
मेडिसिन बाबा को उनके इस समाजहित कार्य के लिए ढेरों पुरस्कार भी मिल चुके हैं। बजाज कंपनी ने उन्हें मोटर साइकिल उपहार में दी। कोलकाता की कंपनी आइसीएमआर ने नैनो कार दी। हांगकांग के एक व्यक्ति ने दिव्यांगों वाली स्कूटी गिफ्ट की है।