कैंसर, अस्थमा को न्यौता दे रहे फूड सप्लीमेंट

नई दिल्ली: मिलावटी फूड सप्लीमेंट सेहत बनाने की बजाय कैंसर और अस्थमा जैसी जानलेवा बीमारियों को न्यौता दे रहे हैं। इस बात का खुलासा जयपुर समेत राज्य की कई फूड टेस्टिंग लैब की जांच में हुआ है। मसल्स, स्मरण शक्ति व परफॉमेंस बढ़ाने के नाम पर मार्केट में बिक रहे फूड सप्लीमेंट में कलर व आर्टिफिशियल स्वीटनर की मिलावट पाई गई है। ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। जांच रिपोर्ट में न्यूरोविट, एन्डुरा मास ब्रांड बनाना फ्लेवर, जिंकोमिन मिक्सड फ्लेवर, प्रोटीकेम चॉकलेट फ्लेवर, विम-जेड ओरेंज फ्लेवर, जीआरडी न्यूट्रीशन सप्लीमेंट विथ चॉकलेट फ्लेवर, प्रोटोसोल पाउडर (माल्ट बेस फुड), रीबोट-एम-सिरप, एम -टोन लिक्विड, एन्जाइम जेड पाउडर, रीकोनिया व लीवोटिल सीरप, लाइकोरेड सीरप शुगर फ्री, जूवी प्रो पाउडर, प्रोटीकेम पाउडर,  विट बेटस जैली, न्यूरो जेड प्लस, एल बेक्स जेड सीरप, ग्लूको गोल्ड, बीटा फ्लू-जेड पाउडर व आइसोमिल (इन्फेन्ट मिल्क) मिलावटी पाए गए हैं। ड्रग कंट्रोलर डॉ. मनोज त्रिपाठी के अनुसार मेडिकल स्टोर संचालक को फूड सप्लीमेंट की बिक्री के लिए दोनों विभागों से लाइसेंस लेना पड़ता है। बच्चों के फूड आइटम जैसे मिल्क पाउडर, हेल्थ ड्रिंक बेचने के लिए भी मेडिकल स्टोर को दवा के साथ अलग से फूड लाइसेंस लेना पड़ता है। नए नियमानुसार फुड सैैफ्टी स्टेंडर्ड ऑथोरिटी ऑफ इंडिया नई दिल्ली ने फूड सप्लीमेंट के कैटेगरी अनुसार लाइसेन्स लेना पड़ता है।
ये हो सकते हैं नुकसान
जेके लोन अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक गुप्ता व एसएमएस अस्पताल के मेडिसन विभाग के डॉ.पुनीत सक्सेना के अनुसार फूड सप्लीमेंट में कलर व आर्टिफिशियल स्वीटनर से सेहत बिगड़ सकती है। कलरिंग एजेन्ट से बच्चों में अटेन्शन व हाइपरएक्टिविटी डिस्आर्डर हो सकता है। वहीं, लंबे समय तक सेवन से कैंसर, एलर्जिक रिएक्शन व अस्थमा हो सकता है। सैकरीन से शुगर तथा पेट से संबंधित बीमारियां हो सकती हंै।
इसके अलावा एक्स्ट्रा सप्लीमेंट का सेवन नींद, भूख और पाचन क्रिया को प्रभावित करता है। टॉनिक से विटामिन्स, प्रोटीन्स की कमी तो पूरी हो जाती है, लेकिन हार्मोन का अनुपात बिगड़ जाता है। इससे व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है और सोचने से पागलपन का शिकार हो सकता है।
जांच करने में विभाग लापरवाह
मेडिकल स्टोर पर फूड सप्लीमेंट की जांच की जिम्मेदारी हर जिले के फूड सेफ्टी विभाग की है, लेकिन खाद्य सुरक्षा अधिकारी दवा की दुकानों की जांच नहीं करते हैं। हर जिले में  खाद्य सुरक्षा अधिकारी की जिम्मेवारी होती है कि वह अपने दायरे में आने वाले मेडिकल स्टोर पर फूड सप्लीमेंट बिक्री की जांच करे, लेकिन देखने में आया है कि ज्यादातर मामलों में विभाग लापरवाह रहता है। इसके चलते मेडिकल स्टोर पर फूड सप्लीमेंट की बिक्री धड़ल्ले से होती रहती है। चिकित्सा मंत्री  कालीचरण सराफ का कहना है कि फूड सप्लीमेंट की जांच में अनसेफ, सबस्टेंडर्ड व मिसब्रांड आने पर मिलावट करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। मिलावटखोर अब सिर्फ जुर्माना देकर नहीं बच पाएंगे।