कृत्रिम हाथ के लिए हर 4 साल में मिलेंगे 5 लाख

नई दिल्ली: एक सडक़ हादसे में हाथ खोकर 60 प्रतिशत तक दिव्यांग हो चुके दिल्ली के 24 वर्षीय सागर बंसल को इंश्योरेंस कंपनी हर 4 साल बाद 5 लाख रुपये भुगतान करेगी, ताकि आगे के जीवन में कृत्रिम हाथ उसका सहारा बन सके। राजधानी की साकेत कोर्ट से मिले न्याय से सागर की आंखों में चमक है।  कृत्रिम हाथ की आयु केवल चार साल तक होती है, इसलिए पीडि़त को नए अंग की जरूरत महसूस होगी। सागर ने अदालत को बताया कि उसने &0 लाख रुपये खर्च करके कृत्रिम हाथ लगवाया है, जिससे वह लिखने और जीविका चलाने के लिए जरूरी काम करने में सक्षम हुआ है। यह कृत्रिम हाथ इतना कारगर है कि आठ किलो तक भार उठा सकता है, लेकिन इसकी उपयोगिता चार साल तक ही है।
न्यायधीश नवीन अरोड़ा ने फैसले में कहा कि हर चार साल में पीडि़त को नया अंग लगाने के लिए इतनी बड़ी राशि का भुगतान करते रहना उचतम स्तर होगा। कृत्रिम अंग लगाने का मकसद कार्यात्मक विकलांगता को कम करना है। अदालत समझती है कि उसे 60 प्रतिशत तक विकलांग मानकर भविष्य में होने वाली आय की भरपाई करने के बाद महंगे कृत्रिम हाथ का खर्च उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, इसलिए कृत्रिम अंग के लिए एकमुश्त पांच लाख रुपये देना उचित होगा। सागर को निर्देश दिया कि भविष्य में हर चार साल में इंश्योरेंस कंपनी के समक्ष लगाए गए नए कृत्रिम अंग का बिल दिखा कर पांच लाख रुपये की राशि लेने का हकदार होगा। साथ ही पीडि़त को 19.25 लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का फैसला सुनाया गया।