अब नहीं होगा बार-बार गर्भपात

‘सनराइज लेप्रोस्कोपिक इनसेरक्लेज’ तकनीक बनी वरदान
चंडीगढ़। अब महिलाओं को बार-बार गर्भपात की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा। इसके समाधान के लिए ‘सनराइज लेप्रोस्कोपिक इनसेरक्लेज’ नामक तकनीक वरदान बनी है। उक्त शब्द वरिष्ठ गाइनी लैपरोस्कोपिक सर्जन डॉ. निकिता त्रेहन ने चंडीगढ़ ओब्स्टिेटिशियन एंड गाइनी सोसाइटी (सीओजीएस) की ओर से आयोजित कांफ्रेंस में कहे। डॉ. त्रेहन ने कहा कि माता-पिता बनने की चाह रखने वाले दंपतियों के लिए गर्भपात बेहद दुखद स्थिति है। लेप्रोस्कोपिक इनसेजक्लेज तकनीक उन महिलाओं के जीवन में उजाला लाती है, जिन्हें गर्भाशय संबंधी समस्या (सर्विकल इंकम्पीटेंस) होती है। इस स्थिति में गर्भाशय का मुंह (गर्भाशय ग्रीवा) समय पूर्व खुल जाता है और गर्भपात होने की समस्या आती है। संक्रमण, हार्मोन समस्या और थ्रोम्बोफिलास या आनुवंशिक विकृतियों के चलते भी कई बार गर्भपात हो जाता है। आज आधुनिक तकनीकों के कारण मरीज को कम समय के लिए ही अस्पताल में रहना पड़ता हैै।