अब मानव अंग भी हो सकेंगे 3-डी प्रिंट

जली और अल्सर प्रभावित त्वचा ट्रांसप्लांट में भी इस्तेमाल होगी प्रिंटेड स्किन

नई दिल्ली। मानव अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में शोधकर्ताओं ने एक नया रास्ता अख्तियार किया है। यह है मानव अंगों की प्रिंटिंग। त्रि आयामी (थ्री डायमेंशनल) प्रिंटिंग के आधार पर अब शरीर के अंग भी प्रिंट किए जा सकेंगे। प्रिंटेड स्किन का उपयोग जली और अल्सर से प्रभावित त्वचा को बदलने में भी हो सकेगा। वर्ष 2000 में बॉयो प्रिंटिंग की शुरुआत में पता चल पाया था कि जीवित कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना इंकजेट प्रिंटर की टोंटी से भेजा जा सकता है। आज कई प्रिंटरों के उपयोग से कोशिकाओं की परतों को जमा कर उन्हें जीवित और सक्रिय टिश्यू का रूप दिया जा सकता है। कई रिसर्चर किडनी, लिवर टिश्यू, स्किन, हड्डी, कार्टिलेज और शरीर के अंगों को जीवित रखने के लिए जरूरी रक्त की शिराओं के नेटवर्क पर प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने जानवरों में प्रिंटेड कान, हड्डियां और मांसपेशियां रोपित की हैं। अमेरिकी हेल्थ केयर कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने बॉयोप्रिंटिंग पर कई विशेषज्ञों और बॉयोटेक्नोलॉजी फर्मों से करार किए हैं। फ्रांसीसी कॉस्मेटिक्स फर्म लॉरियल, अमेरिकी कंज्यूमर गुड्स कंपनी प्रॉक्टर एंड गेम्बल और जर्मन केमिकल कंपनी बीएएसएफ मानवीय त्वचा की प्रिंटिंग पर काम कर रहे हैं। लॉरियल पुरानी टेक्नोलॉजी का उपयोग कर हर वर्ष पांच वर्ग मीटर स्किन पैदा करती है।