बिहार में फार्मासिस्ट नहीं चाहते भाजपा नेता

पटना (बिहार)। सरकार से फार्मासिस्ट की योग्यता खत्म कर देने संबंधी बीजेपी नेता प्रेम कुमार के बयान की चौतरफा निंदा की गई है। कई फार्मासिस्ट संगठनों और समाजसेवी संगठनों ने सोशल मीडिया पर उक्त बयान पर अपना विरोध जताया है। एक समाजसेवी संगठन के अनुसार दवा दुकानों पर फार्मासिस्ट जरूरी है। दवा की गुणवक्ता और उचित खुराक केवल फार्मासिस्ट ही बता सकता है। अगर देश में डॉक्टरों की कमी है तो फार्मासिस्ट को भी डॉक्टर का दर्जा दे देना चाहिए। इन्होंनेे सवाल उठाया कि 7000 फार्मासिस्ट के मुकाबले दवा दुकानें 40 हजार कैसे हो गई? बिना फार्मासिस्ट के ड्रग लाइसेंस कैसे मिला? इसकी जांच होनी चाहिए। आक्रोशित फार्मासिस्टों ने प्रेम कुमार का पुतला जलाया और उनके खिलाफ नारेबाजी भी की। फार्मासिस्टों का कहना है कि राज्य में मात्र दो फार्मेसी कॉलेज हैं। यहां 15 सालों से नियुक्तियां नहीं होने से छात्र फार्मेसी में नामांकन के लिए रुचि नहीं ले रहे। ऐसे में फार्मासिस्टों की संख्या कैसे बढ़ेगी। सरकार को चाहिए कि फार्मेसी कॉलेजों की संख्या बढ़ाकर उनमें पर्याप्त फैकल्टी रखी जाए।