ई-फार्मेसी को हथियार बना, दवा धंधे पर पूरे कब्जे की कोशिश में केंद्र सरकार

खाली हाथ हो जाएंगे केमिस्ट संगठन, दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर लगेगा शुल्क, ई-पोर्टल पर कराना होगा रजिस्ट्रेशन
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दवाओं का इस्तेमाल विनियमित करने के लिए एक व्यापक ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम बनाया है। इससे दवा कारोबार में पारदर्शिता आएगी और नकली दवाओं की पहचान भी आसानी से हो सकेगी। इस ई-पोर्टल पर एक स्वायत्त संगठन द्वारा नजर रखी जाएगी। नए मसौदे के तहत ई-प्लेटफार्म के संचालन के लिए दवा विक्रेताओं से ही राशि जुटाई जाएगी। दवा की ऑनलाइन बिक्री पर विक्रेता को अधिकतम एक फीसदी ट्रांजेक्शन शुल्क देना होगा। यह रकम प्रति लेनदेन दो सौ रुपए से अधिक नहीं होगी। वहीं, ई-पोर्टल पर सभी दवा विक्रेताओं, वितरकों और निर्माताओं को अपना पंजीकरण कराना होगा। दवा निर्माता को अपने स्टॉकिस्ट या थोक विक्रेता को बेची गई दवा की मात्रा, उसका बैच नंबर और एक्सपायरी तारीख जैसे सारे ब्योरे इसे देने होंगे। इसी तरह स्टॉकिस्ट, डिस्ट्रीब्यूटर और खुदरा विक्रेता को भी इस पर अपनी बिक्री के सारे ब्योरे देने होंगे। ये आंकड़े कारोबारी अपने कंप्यूटर या मोबाइल के जरिए वेबसाइट पर डाल सकेंगे। ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों के खुदरा विक्रेताओं को हर पखवाड़े अपने आंकड़े अपलोड करने की छूट होगी।
बता दें कि किसी भी फार्मा कंपनी को अपने प्रोडक्ट को लॉन्च करने के लिए संबंधित राज्य की केमिस्ट एसोसिएशन से एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लेने को मजबूर होना पड़ता था। इस एवज में एसोसिएशन के अवैतनिक पदाधिकारी फार्मा कंपनियों से संगठन के नाम पर चंदे के रूप में मोटी राशि लेते थे। सरकार की नई दवा नीति से फार्मा कंपनियां खुश दिख रही हैं, लेकिन दवा दुकानदार और इनकी एसोसिएशनों में अंदरखाने पूरी हलचल मची है। सख्ताई के साथ यह कानून धरातल पर जिस दिन सार्वजनिक तौर पर अमल में आ जाएगा, उस दिन से दवा संगठनों के सहारे नाम चमका कर दाम वसूलने वाले पदाधिकारियों के पास सिवाय दवा बेचने के कुछ नहीं बचेगा।