इन दिग्गज फार्मा कंपनियों को उठाना पड़ा नुकसान

मुंबई। जेएसडब्ल्यू स्टील का एकीकृत शुद्ध लाभ दिसंबर तिमाही में काफी कमजोर रहा और कंपनी का लाभ एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 10 फीसदी घटकर 1,603 करोड़ रुपए रहा। कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी के चलते कंपनी का खर्च बढ़ा, जिससे मुनाफे पर चोट पड़ी। दिसंबर तिमाही में कंपनी का राजस्व पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 11 फीसदी की उछाल के साथ 20,318 करोड़ रुपये रहा क्योंकि लंबी अवधि के अनुबंधों से ज्यादा कीमत मिली, देसी बाजार में ज्यादा माल बिका जबकि इस अवधि में देश में स्टील की कीमतें कम रहीं। वैश्विक आपूर्ति, चीन में मंदी और विभिन्न देशों के कारोबारी कदमों के चलते कंपनी का निर्यात साल दर साल के हिसाब से 70 फीसदी फिसल गया। कंपनी के शुद्ध राजस्व में निर्यात की 10 फीसदी हिस्सेदारी है।
 तिमाही के दौरान इसका उत्पादन 7 फीसदी घटकर 36.8 लाख टन रहा। कंपनी ने कहा कि चौथी तिमाही में वॉल्यूम सुधरने की संभावना है और कंपनी की कुल बिक्री वित्त वर्ष 2019 में 1.6 करोड़ टन से 2-3 फीसदी कम रह सकती है। ब्लूमबर्ग ने कंपनी का राजस्व 20,918 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था जबकि मुनाफा 1,727 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद जताई थी। एकीकृत आधार पर इसका प्रति टन एबिटा 12,441 रुपये रहा, जो पहले 9,557 रुपये रहा था। वहीं एकल आधार पर यह 4,063 रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में 8,994 रुपये रहा था। तिमाही के दौरान कंपनी की लागत साल दर साल के हिसाब से 20 फीसदी बढ़ी, वहीं कुल खर्च में 11 फीसदी का इजाफा हुआ। एकल आधार पर कंपनी का शुद्ध लाभ एकीकृत मुनाफे से ज्यादा यानी 1,892 करोड़ रुपए रहा। कंपनी के संयुक्त प्रबंध निदेशक शेषगिरि राव ने कहा कि एकीकृत स्तर पर अमेरिका व यूरोप में वैश्विक अधिग्रहण के चलते ह्रïास व ब्याज का योगदान रहा, जिसकी वजह से शुद्ध मुनाफा कम हुआ। दिसंबर 2018 के आखिर में कपनी का एकीकृत शुद्ध कर्ज 46,000 करोड़ रुपये था और कर्ज-इक्विटी अनुपात 1.4। इसका एबिटा अनुपात 2.32 था। यह बताता है कि जेएसडब्ल्यू की बैलेंस शीट मजबूत है।
वहीं, दवा बनाने वाली अन्य कंपनी ल्यूपिन को चालू वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में 151.75 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। कंपनी ने कहा कि इसका कारण यूरोप में रक्तचाप की दवा पेरिन्डोप्रिल से संबंधित मुकदमे के लिए एक बार में किया गया 342.22 करोड़ रुपये का किया गया प्रावधान है। कंपनी को पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 221.73 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। कंपनी ने एक बयान में कहा कि आलोच्य तिमाही के दौरान परिचालन से प्राप्त आय 3,900.36 करोड़ रुपये से बढक़र 4,377.94 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। ल्यूपिन के प्रबंध निदेशक नीलेश गुप्ता ने कहा कि अमेरिका में पूर्वार्ध में मुश्किलों का सामना करने के बाद अब कंपनी बढ़ोतरी दर्ज कर रही है। एक और दिग्गज दवा निर्माता सिप्ला का एकीकृत शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 20 फीसदी की गिरावट के साथ 322.24 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के लाभ में यह कमी मुख्य रूप से अधिक कर के भुगतान के कारण हुई है। सिप्ला ने बीएसई को दी जानकारी में कहा है कि पिछले साल की इसी अवधि में उसे 403.45 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध लाभ हुआ था। कंपनी ने कहा है कि इस साल अक्टूबर-दिसंबर की अवधि में उसकी कुल एकीकृत आमदनी 4,007.54 करोड़ रुपए रही, जो पिछले साल की इसी अवधि में 3,913.82 करोड़ रही थी। सिप्ला के प्रबंध निदेशक और वैश्विक मुख्य कार्यपालक अधिकारी उमंग वोहरा ने कहा कि कुल मिलाकर इस तिमाही में चुनौतियां अपेक्षित थीं। हालांकि वित्त वर्ष 2019-20 में प्रवेश को लेकर हम आशान्वित हैं। आगामी तिमाहियों से साल दर साल वृद्धि हासिल करने की हमारी योजना पर काम चल रहा है।