मेडिकल स्टोर पर नकली बिक रही एल्प्राजोलाम

गोरखपुर। मानसिक शांति के लिए दी जाने वाली दवा एल्प्राजोलाम क्षेत्र के कई मेडिकल स्टोर पर नकली बेचे जाने का मामला सामने आया है। इस दवा में एल्प्राजोलाम की मात्रा ही नहीं मिली है। हालांकि यह दवा नुकसान नहीं करेगी, लेकिन मर्ज को भी दूर नहीं करेगी। इसके अलावा, दुधारू पशुओं के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन भी नकली मिला है। जानकारी अनुसार ड्रग इंस्पेक्टर संदीप कुमार ने पिछले दिनों जिला अस्पताल के सामने स्थित एक दुकान से एल्प्राजोलाम टैबलेट का सैंपल लिया था। इसे जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा गया था। जांच में दवा नकली होने की पुष्टि हुई। डीएलए प्रभात कुमार तिवारी और ड्रग इंस्पेक्टर संदीप कुमार ने पिछले वर्ष नौसड़ स्थित पशु आहार बेचने वाली दुकान पर छापा मारा था। आरोपी दुकानदार रामकिशन ने ऑक्सीटोसिन के कई वायल छुपा कर रहे थे। वायल का सैंपल जांच के लिए भेजा गया था। जांच में यह भी नकली मिला है। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि अप्रैल 2018 से जनवरी 2019 तक जिले में 69 दवाओं के नमूने भरकर जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें से 58 की रिपोर्ट आ चुकी है। दो दवाएं अधोमानक और एक दवा मिथ्या छाप की श्रेणी में मिली है। उन्होंने बताया कि बिना लाइसेंस संचालित हो रही दुकानों की जांच में मिली दवाएं सीज कर दी जाती हैं। औषधि प्रशासन विभाग बिना लाइसेंस संचालित हो रही तीन दुकानों में तकरीबन पांच लाख रुपए की दवाएं सीज कर चुका है। इस संबंध में ड्रग इंस्पेक्टर संदीप कुमार का कहना है कि एल्प्राजोलाम और ऑक्सीटोसिन के सैंपल फेल मिले हैं। एल्प्राजोलाम बनाने वाली हिमाचल की कंपनी के खिलाफ एफआइआर दर्ज करा दी गई है। जिसके पास ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन मिले हंै उसके खिलाफ एफआइआर होगी। ऑक्सीटोसिन पर न तो निर्माता और न ही कोई अन्य जानकारी उपलब्ध थी।