दवा व्यापारी बीसीडीए की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट 

बलिया। दवा व्यापारियों ने बलिया केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन (बीसीडीए) की कार्यप्रणाली से असंतुष्टता जताई है। इस संबंध में कैमिस्ट ड्रगिस्ट एसोसिएशन एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता, चेयरमैन रविशंकर सिंह पिक्कू, उपाध्यक्ष ने संयुक्त प्रेसवार्ता की। इस मौके पर पदाधिकारियों ने कहा कि बीसीडीए का पंजीकरण सन् 2007 में कराया गया, लेकिन 2011 में संगठन चुनाव के समय से अनर्गल व्यवहार व तानाशाही की गई। उन्होंने कहा कि 2011 के चुनाव के बाद से कार्यकारिणी ही नहीं बनाई गई। इस दौरान न तो आम बैठक की गई और न ही एजुकेशनल प्रोग्राम चलाए गए। वर्ष 2012 से अब तक संस्था के नवीनीकरण की कोई सूचना अपने पदाधिकारियों व सदस्यों को नहीं दी गई। सन 2011 से आय-व्यय का कोई विवरण नहीं दिया गया। एक सवाल के जवाब में बीसीडीए के पूर्व मंत्री रहे अरुण कुमार गुप्त ने बताया कि इस चुनाव के समय तक हम भी इसी संस्था से जुड़े रहे। सदस्यता शुल्क के रूप में तीन लाख 23 हजार सात सौ रुपए वसूले गए। इसका कोई हिसाब चुनाव अधिकारियों नहीं दिया गया। बिना रजिस्टर्ड संस्था का चुनाव कराकर असंवैधानिक प्रक्रिया अपनाई गई। सीडीए के पदाधिकारियों द्वारा बाढ़ पीडि़तों के नाम पर 35 सौ रुपए सहायतार्थ दिया गया, जिसका बंदरबांट किया गया। कहा कि मै बीसीडीए का महामंत्री रहने के बाद भी कागज में किसी दूसरे का नाम चल रहा था। ऐसे में हम लोगों ने अपनी उपेक्षा को ध्यान में रखकर केमिस्ट ड्रगिस्ट एसोसिएशन एंड सोशल वेलपफेयर सोसाइटी का गठन किया है। यह दवा विक्रेताओं के हित एवं सामाजिक कार्य करेगी।
उधर, बलिया केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों की बैठक दवा मार्केट में आयोजित की गई। बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंह ने कहा कि कुछ पद लोलुप और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नकारे गए लोग बीसीडीए से अलग होकर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। यह दवा कारोबारियों को खंडित करने का असफल प्रयास है। जिले के सभी दवा कारोबारी भली-भांति जानते हैं कि नया संगठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नकारे गए लोगों का महागठबंधन है। इस मौके पर रामेंद्र नाथ वर्मा, अनिल कुमार गुप्त, बद्रे आलम, राजकुमार सिंह, मुमताज अहमद, संजय दूबे, प्रमोद वर्मा, मनोज कुमार श्रीवास्तव, राकेश श्रीवास्तव, अजय ओझा, राकेश मिश्रा, प्रवीण राय, विशाल सिंह आदि मौजूद रहे।