नकली दवाओं की कालाबाजारी जोरों पर

उदयपुर। प्रदेश में नकली दवाओं की कालाबाजारी जोरों पर है। नकली दवाओं की जांच करने वाली एकमात्र लैब प्रदेश में सिर्फ जयपुर में ही होने से सैंपल की रिपोर्ट महीनों तक नहीं आती। वहीं, प्रदेशभर में केवल 115 ड्रग इंस्पेक्टर हैं, जिन्हें प्रतिमाह सिर्फ एक ही सैंपल लेने के निर्देश जारी किए गए हैं। पहले उन्हें हर माह छह सैंपल लेने होते थे। इसे इसलिए घटा दिया गया है ताकि ज्यादा सैंपल पेंडिंग न दिखें। इससे बचने के लिए विभाग ने 15 जनवरी से प्रत्येक इंस्पेक्टर को एक माह में सिर्फ एक ही सैंपल लेने के आदेश जारी कर रखे हैं। इधर, ड्रग माफिया धड़ल्ले से नकली दवाएं बेच रहे हैं। सैंपल जांच रिपोर्ट आने में छह माह से एक साल तक का समय लग रहा है। अब हालात यह हैं कि रिपोर्ट आने से पहले ही नकली दवाओं का स्टॉक ही खत्म हो जाता है। इस आदेश का उद्देश्य जयपुर स्थित औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में पड़े करीब छह हजार जांच नमूनों की पेंडेंसी पर पर्दा डालना है। विभाग ने उदयपुर में नकली दवा का सैंपल लिया था, जिसकी जांच में दवा कंटेंट निल यानी शून्य निकले थे। जबकि एक गोली की बाजार कीमत नौ रुपए थी। हैरानी की बात यह है कि इसकी जांच रिपोर्ट सात माह बाद आई] जब तक दवा मरीजों में सप्लाई हो चुकी थी। हालांकि अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घोषणा की है कि उदयपुर, जोधपुर और बीकानेर औषधि परीक्षण प्रयोगशाला को चालू कर समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। बड़ी स्थित सीएमएचओ कार्यालय कैंपस में दो साल पूर्व तैयार हुए प्रयोगशाला भवन में अब मशीन इंस्टॉलेशन की तैयारी की जा रही है।  ड्रग विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पिछले दस वर्ष में दवाओं के 1320 सैंपल जांच में फेल हो चुके हैं। नकली दवाओं को जांचने के लिए सरकार के पास पर्याप्त संसाधन तक नहीं हैं। दवाओं के करीब छह हजार सैंपल लैब में जांच का इंतजार कर रहे हैं। स्थिति इतनी अनकंट्रोल है कि जब तक जांच रिपोर्ट आती है तब तक दवा हजारों मरीजों में बंट चुकी होती है। जयपुर स्थित ड्रग टेस्टिंग लैब एक माह में सिर्फ 300 नमूनों की ही जांच कर पाती है। ड्रग कंट्रोलर प्रथम राजाराम शर्मा ने बताया कि उदयपुर, जोधपुर और बीकानेर से जयपुर भेजने वाले सेंपल की जांच वहीं की प्रयोगशालाओं में हो जाएगी। रिपोर्ट भी जल्द मिलने पर समय पर कार्रवाई की जा सकेगी। इसके लिए 15 करोड़ के भवन तैयार करा दिए गए हैं। 18 करोड़ की लागत से अन्य संसाधन मुहैया कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।