मेडिकल एजेंसी के गोदाम पर रेड, 36 लाख की दवाइयां बरामद 

मेरठ। औषधि विभाग की टीम ने पुलिस को साथ लेकर गांव मुल्हेड़ा में एक मेडिकल एजेंसी पर रेड की। टीम ने एजेंसी के गोदाम से करीब 36 लाख रुपए की दवाइयां बरामद की हैं। अमानक होने के संदेह में जब्त की गई इन दवाओं के सैंपल लेकर जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सरधना थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मेडिकल संचालक और उसके पुत्र को हिरासत में ले लिया है। सहायक आयुक्त औषधि प्रशासन राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि ड्रग्स विभाग को रुडक़ी की एक फर्जी कंपनी में इन एंटीबॉयोटिक दवा बनाने की जानकारी मिली थी। ड्रग्स विभाग की टीम ने मुखबिर की सूचना पर श्याम मेडिकल एजेंसी के गोदाम पर रेड कर 36 लाख रुपए से अधिक की एंटीबॉयोटिक दवाइयां बरामद कर ली। टीम में थानाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह राठौर, ड्रग्स विभाग की टीम में ड्रग्स इंस्पेक्टर बागपत वैभव बब्बर, ड्रग्स इंस्पेक्टर मेरठ पवन शाक्य, ड्रग्स इंस्पेक्टर हापुड़ लवकुश प्रसाद, ड्रग्स इंस्पेक्टर बुलंदशहर दीपा लाल भी शामिल रहे। ड्रग्स सहायक आयुक्त ने बताया कि छापेमारी के दौरान मेडिकल संचालक मौके से भाग निकला जबकि उसका बेटा व एक अन्य को मौके से पकड़ा गया है। बाद में संचालक भी आ गया। उन्होंने बताया कि दवाइयों का गोदाम बिना लाइसेंस के चल रहा था। जो दवाइयां बरामद हुई हैं, उनके अमानक होने का संदेह है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। एंटीबॉयोटिक अमानक दवा को कैसे तैयार किया जा रहा था, उसकी भी जांच कराई जाएगी। ये एंटीबायोटिक दवाइयां विभिन्न मर्जों में इस्तेमाल की जाती हैं। ड्रग्स विभाग की टीम ने पिछले साल इस मेडिकल एजेंसी पर छापेमारी कर एंटीबायोटिक दवा के सैंपल लिए थे। दिसंबर 2018 में इसकी रिपोर्ट आई थी। ड्रग्स इंस्पेक्टर पवन शाक्य ने बताया कि दवा में एंटीबायोटिक का साल्ट ही नहीं था। इसी के बाद संदेह हुआ था कि यहां नकली एंटीबायोटिक दवाइयां बन रही होंगी। तभी से इसकी मॉनिटरिंग की जा रही थी और अब छापेमारी की गई। सहायक आयुक्त ने बताया कि विभाग यह पड़ताल करेगा कि इस दवा की कहां-कहां सप्लाई की जाती थी। किन मेडिकल स्टोरों पर सप्लाई होती थी। मेरठ में ही सप्लाई होती थी या दूसरे जिलों में भी इसकी सप्लाई होती थी। यह जांच के बाद ही पता चल पाएगा।