भारत में हेल्थ पॉलिसी का ग्राउंड चैलेंज

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की नई स्वास्थ्य नीति कारगर सिद्ध होगी या नहीं, इस पर संशय है। सरकार ने नई नीति में स्वास्थ्य पर जीडीपी का 2.5 फीसदी खर्च करने का इरादा जताया है। अभी यह खर्च जीडीपी का 1.04 प्रतिशत है। सरकार का लक्ष्य है कि देश के 80 फीसदी लोगों का इलाज सरकारी अस्पताल में पूरी तरह मुफ्त हो। हेल्थ पॉलिसी में सभी मरीजों को बीमा लाभ देने का भी प्रावधान है। उन्हें प्राइवेट अस्पताल में भी इलाज करवाने की छूट मिलेगी। स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत निजी अस्पतालों को ऐसे इलाज के लिए तय रकम दी जाएगी। जिला अस्पताल और इससे ऊपर के अस्पतालों को सरकारी नियंत्रण से अलग किया जाएगा और इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप में शामिल किया जाएगा।
अब सवाल यह उठता है कि भारत जैसे देश में, जहां कुपोषण के चलते हर साल पांच साल से कम उम्र के करीब दस लाख बच्चे मौत का ग्रास बन जाते हों, क्या वहां यह नीति पर्याप्त है? हेल्थ के लिए जीडीपी की 2.5 फीसदी राशि अब भी बहुत कम है। ब्रिक्स देशों में ब्राजील अपनी जीडीपी का &.8 प्रतिशत, रूस &.7 प्रतिशत और चीन &.1 प्रतिशत सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्च करते हैं। फिर भी केंद्र सरकार ने एक कदम आगे की ओर जरूर बढ़ाया है। असल चुनौती स्वास्थ्य नीति को जमीन पर उतारने की है। यह तभी कारगर हो पाएगी जब राज्य सरकारें इसे गंभीरता से लें। स्वास्थ्य राज्य का विषय है और राज्य अपनी प्राथमिकता के आधार पर इसका बजट रखते हैं। योजना आयोग के भंग होने के बाद राज्य सरकारों की भूमिका और बढ़ गई है।