अब बेअसर नहीं होंगे एंटीबायोटिक

नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एंटीबायोटिक का गलत तरीके से इस्तेमाल रोकने और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी एएमआर का संकट मिटाने के लिए चार क्लासिफिकेशन बनाए हैं।
गौरतलब है कि कई बार हम बुखार या सिरदर्द अथवा सामान्य इंफेक्शन होने पर मनमर्जी से दवा ले लेते हैं और डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी नहीं समझते। कई बार डॉक्टर के लिखे दवाई के पुराने पर्चे से ही दवाई लेकर खाते रहते हैं। लेकिन असल में यह बेहद खतरनाक है। इसकी वजह से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की स्थिति विकराल रूप ले रही है। यह एक तरह का मेडिकल संकट है, जिसे हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2019 की टॉप 10 वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल किया था। इतना ही नहीं, एएमआर से निपटने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चार नई कैटेगरी बनाई हैं ताकि इनका गलत तरीके से इस्तेमाल न किया जा सके। इन कैटेगरी में एक है एक्सेस। ये ऐसे एंटीबायोटिक होते हैं जोकि सामान्य इंफेक्शन के लिए फस्र्ट या फिर सेकंड लाइन ट्रीटमेंट का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये एंटीबायोटिक आसानी से उपलब्ध होने चाहिए। दूसरी कैटेगरी रिजर्व है, जिसमें ऐसे ऐंटीबायॉटिक आते हैं जोकि मल्टी या फिर बड़े पैमाने पर प्रतिरोधी बैक्टीरिया के प्रति ज्यादा असरदार हैं। ऐसे एंटीबायोटिक बहुमूल्य हैं और इन्हें बेहद समझदारी से इस्तेमाल करने की जरूरत है क्योंकि ये नॉन रिन्युबल होते हैं। तीसरे, वॉच कैटेगरी में आने वाले एंटीबायोटिक उन बीमारियों के इलाज में प्रभावी हैं जिनके बारे में स्पष्ट जानकारी है। लेकिन इनके इस्तेमाल की करीबी से जांच की जानी चाहिए और सीमित उपयोग करना चाहिए। वहीं, डिसकरेज्ड कैटेगरी में कुछ एंटीबायोटिक ऐसे होते हैं जो मनुष्यों में किसी भी तरह के इंफेक्शन में असर नहीं करते। इससे न सिर्फ एएमआर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है बल्कि मरीज की सुरक्षा पर भी संकट आ जाता है।
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