सावधान! कहीं आप दवा के नाम पर जहर तो नहीं खा रहे

जयपुर में 50 लाख की नकली दवाएं जब्त
जयपुर। सावधान! कहीं आप दवा के धोखे में जहर तो नहीं खा रहे। नकली दवा के कारोबार ने देशभर में अपने पैर फैला लिए हैं। इसका खुलासा जयपुर में ड्रग्स डिपार्टमेंट की कार्रवाई में हुआ है। टीम ने मेडिसन से लेकर आईसीयू तक भर्ती मरीजों को इंफेक्शन होने पर दी जाने वाली एंटिबायोटिक्स की 50 लाख की नकली दवा का जखीरा पकड़ा है।
बता दें कि जयपुर से नकली दवाओं का देशव्यापी कारोबार चल रहा है। राजस्थान के लगभग सभी जिलों में बीती देर रात तक छापेमारी की गई। ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक के अनुसार कार्यवाही रेल नगर स्थित कमला एंटरप्राइजेज के गोदाम में स्टॉक में की गयी थी। कमल एंटरप्राइजेज के पास दवा का सेल लाइसेंस था मगर स्टॉक लाइसेंस नहीं था इसी के चलते इस गोदाम पर कार्रवाई की गई लेकिर अंदर जाकर जब माजरा देखा गया तो सबकी आंखें फटी की फटी रह गयी। कमला एंटरप्राइजेज के मालिक विनोद कुमार से टीम पूछताछ जारी है। ड्रग डिपार्टमेंट ने एंटिबायोटिक दवा मेडसेफ 200 एमजी, मिक्सीन 200 एमजी, जानफिक्स 200 एमजी एवं केटीसील 200 एंटीबायोटिक दवा का सैंपल लिया था जिनमें जीरो घटक पाया गया। शुरूआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने नकली एंटीबायोटिक बनाने पर ही जोर दिया क्योंकि एंटीबायोटिक सभी बीमारियों में काम आती है। हर डॉक्टर एंटीबायोटिक लिखता है। हर रोज लाखों की एंटीबायोटिक ही बिकती हैं। पकड़ी गई दवाएं उत्तराखंड से मेन्यूफेक्चरिंग बताई गई हैं लेकिन विभाग को शक है कि मेन्युफेक्चरिंग वहां नहीं हो रही है। फिलहाल उत्तराखंड के ड्रग कंट्रोलर को इस सम्बन्ध में जांच के निर्देश दिए गए हैं। कमला एंटरप्राइजेज पिछले दस सालों से एंटीबायोटिक के रूप में दवाओं का कारोबार कर रहा था। विभाग ने जब अवैध गोदाम समझकर यहां छापा मारा तो नकली दवाएं देखकर हर किसी का सिर चकरा गया। ड्रग कंट्रोलर विभाग को शक है कि आरोपी कई साल नकली दवाओं का कारोबार कर रहा था और आह अब तक करोड़ों की नकली दवाएं बाजार में सप्लाई कर चुका है। सोचने वाली बात ये है कि बीते दस साल में ड्रग कंट्रोलर की टीम ने 3 बार इसके सैम्पल भी लिए हैं लेकिर किसी भी कार्रवाई में ये सैम्पल फेल नहीं हुए। इसके चलते अंदाजा लगाया जा रहा है कि आरोपी का विभाग में भी किसी गठजोड़ होगा जिसकी वजह से सैंपल सही निकलते हैं। इस छापेमारी में लिए गए सैंपल में दवाओं में शून्य घटक पाया गया है। मतलब यह दवा मिट्टी या चूने से ज्यादा नहीं।