दवा की लोकल खरीद में कमीशनखोरी, मरीज बेहाल

जबलपुर: राज्य के स्वास्थ्य विभाग में दवाईयों की लोकल खरीद में कमीशन केबड़े खेल की बू आ रही है। कमीशन के चक्कर में दवाईयों की खरीद ज्यादा से ज्यादा लोकल स्तर पर करने का दबाव बनाया जाता है। खेल में लोकल स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका है। पहले ऑर्डर रोक कर दवाईयों की कमी करते हैं और बाद में दवाईयों का टोटा दिखाकर हल्ला कर देते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, ऐसा दवा खरीद घोटाला पूरे प्रदेश में चल रहा है। दबाव में होने वाली लोकल खरीद में पैसे की बंदरबांट होती है। मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विस कॉपोर्रेशन (दवा उपार्जन) के एमडी डॉ. पंकज जैन के पास इसकी पूरी जानकारी है। जबलपुर के साथ-साथ पूरे प्रदेश में दवा खरीद में गड़बडिय़ों का पता लगाकर दोषियों को दंडित करने की तैयारी है।
हकीकत तब उजागर हुई जब डॉ.पंकज जैन ग्वालियर में सीएमएचओ के दवा स्टोर का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां डायरिया की सामान्य दवा मेट्रोजिल तक नहीं मिली। पूछने पर बताया कि मेट्रोजिल दवा के ऑर्डर ही नहीं किए गए जबकि जनवरी महीने में ही राजधानी से सख्त आदेश जारी हुए थे कि बढ़ती गर्मी और बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए मेट्रोजिल सहित सभी जरूरी दवाईयोंं का स्टॉक पूरा करें लेकिन कमीशनखोरी के धंधे में आदेश हवा हो गए।
वहीं, नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कई इमरजेंसी दवाएं नहीं है। मजबूरन मरीज बाहरी केमिस्टों से दवा खरीद रहे हैं। आपरेशन तक के लिए जरूरी दवाएं एवं उपकरण मेडिकल स्टोर से महंगे दाम पर खरीदने पड़ते हैं। नॉयलोन, सिल्क और बैंडेज भी शासकीय सप्लाई में नहीं आ रही। आपतकालीन विभाग में स्टिचिंग के लिए भी मरीज दर्द से कराह रहे हैं।