स्वास्थ्य विभाग में अटकी ड्रग विभाग की फाइल का राज

रोहतक । सुविधाजनक व्यवस्था बनाने के लिए ड्रग विभाग के 7 जोन से बढ़ा कर 10 कर दिए और फाइल मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर दफ्तर तक भी पहुंच गई। पर पता नहीं स्वास्थ्य विभाग इससे जुड़ी फाईल आगे क्यूं नहीं सरका रहा। दो बाते हैं, या तो स्वास्थ्य विभाग जनता की भलाई के मूढ़ में नहीं है या फिर वह अपने ड्रग अधिकारियों को तकलीफ देना नहीं चाहता। क्योंकि इसे 7 से 10 करते वक्त यही आधार बताया है कि लोगों को धक्के न खाने पड़े। वैसे, इसके पीछे दूसरा पहलू भी कि जोन तो बढ़ा दिए लेकिन अफसरों की संख्या बढऩे की बजाए कम हो रही है। पिछले दिनों ड्रग कंट्रोलर सिंगला सेवानिवृत्त हुए थेे और अब अगले कुछ ही दिनों में एमपी गुप्ता इस पद से रिटायर हो रहे है। इनकी जगह संभालने वाले अफसर नीचे से ही ऊपर आएंगे। यानी नीचे का खाना तो खाली ही रह गया। उस खाने को भरने का कोई प्लान स्वास्थ्य विभाग में दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है।
     स्वास्थ्य जानकारों की मानें तो ऐसे विभागों में नियुक्तियां तब निकलती हैं जब संबंधित सत्तासीन पार्टी से सरोकार रखने वाले चहेते उम्मीदवार इन पदों की इलीजिबलेटी पूरी करने लायक हो जाएं। फिर फाइलें अटकती नहीं दौड़ती हैं। खैर, मुद्दे की बात पर आते हैं कि ड्रग विभाग के जोन बढ़ाने की फाइल क्यों नहीं सरक रही। मसला जोन बढ़ाने से हल नहीं होने वाला। जोन बढ़ा भी दिए जाएं तो भी क्या होगा। एक ड्रग अधिकारी को कई जगहों के चार्ज है। सप्ताह में तीन दिन कोर्ट। ड्रग अधिकारी भी क्या करें। काम तो एक ही हो सकता है या तो इनसे दवाओं की गुणवत्ता जांच करवा लों या कागज काले करवा लो। कुल मिलाकर सिस्टम जैसा था, वैसे ही चलना है। फाइले बनाना, उन पर होमवर्क करना और फिर ठंडे बस्ते में डालकर इतिश्री कर लेना, उसी सिस्टम का हिस्सा है।