इस भारतीय फार्मा कंपनी के गैर-ब्रांडेड दवा कारोबार में आएगी कमी

मुंबई। भारतीय दवा कंपनी सिप्ला अगले वित्त वर्ष में गैर-ब्रांडेड दवाओं की बिक्री में कमी दर्ज कर सकती है। विश्लेषकों के अनुसार सिप्ला को देसी राजस्व का 20 फीसदी इस क्षेत्र से आता है, जो भारतीय दवा फर्मों में सबसे ज्यादा है। ट्रेड जेनेरिक्स कारोबार का मतलब मूल रूप से गैर-ब्रांडेड दवाओं की बिक्री से है। जिन नवोन्मेषी दवाओं का पेटेंट खत्म हो चुका है, उसके नाम पर बनने वाली दवाएं जेनेरिक्स होती हैं। ट्रेड जेनेरिक्स सीधे-सीधे वितरक को भेजे जाते हैं और इसका विपणन मेडिकल रीप्रेजेंटेटिव के जरिए नहीं होता है।
आशिका इंस्टिट्यूशनल रिसर्च के विश्लेषक श्रीकांत अकोलकर ने कहा कि ट्रेड जेनेरिक्स में सिप्ला बड़ी कंपनियों में से एक है, जो अपने देसी राजस्व का करीब 20 फीसदी हिस्सा इससे हासिल करती है। अन्य प्रमुख कंपनी अल्केम है। यह वॉल्यूम वाला क्षेत्र है, लेकिन कम मार्जिन वाला भी है। लेकिन यह विपणन लागत भी बचाता है और दूरदराज में होने वाली बिक्री में ज्यादा लोकप्रिय भी है जहां कंपनियां बिक्री टीम तैनात नहीं करती। गैर-ब्रांडेड या जेनेरिक दवाएं बेचने वाली फार्मेसी शृंखला में बढ़ोतरी और जेनेरिक्स पर सरकारी जोर को देखते हुए सिप्ला के ट्रेड जेनेरिक्स कारोबार में आगामी महीनों में बढ़ोतरी दिख सकती है।
पिछले कुछ महीनों में सिप्ला ने देसी वितरण नेटवर्क का पुनर्गठन किया है, जिसके कारण साल की पहली तिमाही में उसे 200 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ। भारतीय कारोबार में इसके परिणामस्वरूप पहली तिमाही में तेज गिरावट देखने को मिली, जो साल दर साल के हिसाब से करीब 12 फीसदी फिसली। सिप्ला के संयुक्त अध्यक्ष और वैश्विक सीएफओ केदार उपाध्याय ने कहा कि जीएसटी के बाद वितरण में बदलाव सतर्कता के साथ उठाए गए कदम का नतीजा था, जहां हमने इन्वेंट्री का स्तर सामान्य बनाया और लंबी अवधि के कारोबार को बनाए रखने के लिए वितरक पर संकेंद्रण का जोखिम घटाया।
जेपी मॉर्गन ने कहा कि 200 करोड़ रुपये का असर उसके वित्त वर्ष 2019 के जेनेरिक काराबोर के राजस्व का करीब 14 फीसदी है। सिप्ला हालांकि पर्ची के जरिए बिकने वाली दवाओं के कारोबार में दो अंकों की बढ़त की उम्मीद कर रही है, वहीं वित्त वर्ष 2016-19 में यह रफ्तार 4 से 10 फीसदी रही है। एडलवाइस के विश्लेषक दीपक मलिक ने पाया कि सिप्ला का ट्रेड जेनेरिक कारोबार वित्त वर्ष 2018 के 1,232 करोड़ रुपये के मुकाबले वित्त वर्ष 2019 में 1,442 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि वित्त वर्ष 2020 में इसके करीब 1,300 करोड़ रुपये पर पहुंचने की उम्मीद है और सुधारे गए वितरण नेटवर्क का योगदान शुरू होने के बाद इसमें और तेजी आएगी। विश्लेषकों का हालांकि मानना है कि कारोबार में धीरे-धीरे सुधार आएगा क्योंकि नए वितरकों ने आपूर्ति बढ़ाई है। आशिका ने कहा कि भारतीय कारोबार तीसरी तिमाही में सामान्य होने की उम्मीद है। एडलवाइस ने कहा कि वित्त वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही में जेनेरिक कारोबार सुधरेगा और वित्त वर्ष 2020 की दूसरी छमाही में सामान्य हो जाएगा। कुल मिलाकर वित्त वर्ष 2020 में भारतीय राजस्व 5-6 फीसदी बढऩे की संभावना है। उपाध्याय ने भी कहा कि हमें लगता है कि ट्रेड जेनेरिक्स कारोबार तीसरी तिमाही में पूरी तरह सामान्य हो जाएगा और इसके बाद सही रफ्तार पर आ जाएगा।

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