दवा धंधे में मुनाफा कम तो सप्लाई भी बंद

पटना (बिहार)। विख्यात दवा बाजार गोविंद मित्रा रोड पर सस्ती जेनेरिक दवाओं का भारी संकट छा गया है। इनकी जगह अब ब्रांडेड रैपर में मिलने वाली महंगी दवाओं ने ले ली है। बताया जा रहा है कि जीएसटी की घोषणा के चलते कम लाभ देने वाली दवाओं की सप्लाई कंपनियों ने बंद कर दी है। इससे मरीज परेशान और हताश हैं। वे महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर हो चले हैं। सस्ती जेनेरिक दवाएं बाजार से गायब हो चली हैं। इनकी जगह ब्रांडेड  कंपनियों के रैपर में दवाएं मिल रही हैं। या फिर यूं कहें कि सस्ती जेनेरिक दवाओं को महंगी कीमत पर बेचा जा रहा है। गैस की दवा पैंटोप्राजोल 40 एमजी जेनेरिक में एक रुपए से भी कम में आती है, लेकिन ब्रांडेड रैपर में इसकी एक गोली 10 रुपये में मिल रही है।
     इसी तरह कोलेस्ट्रॉल की दवा रोजूवस्टाटीन की जेनेरिक में कीमत 2 रुपये से कम है, जबकि ब्रांडेड में इसकी एक गोली 14 रुपये तक मिलती है। बिहार केमिस्ट एंड ड्रग एसोसिएशन के सचिव संतोष कुमार का कहना है कि बीते साल नई औषधि नीति लागू होने से ज्यादातर कंपनियों को लाभ कम हो गया। इसके चलते कंपनियों ने कई सस्ती दवाओं का निर्माण बंद कर दिया है। प्रधानमंत्री जन औषधि दुकानें अभी तक भी नहीं खुल सकी  है। नई नीति के तहत एमआरपी कम करने की बात की जा रही है, लेकिन अभी तक यह समझ से परे है।