मेडिकल स्टोरो पर बिकता नशा

हरिद्वार जिले में शासन-प्रशासन की उदासीनता के कारण नशे का कारोबार करने वाले गिरोह सक्रिय हैं। लेकिन जनप्रतिनिधियों ने उनके विरुद्ध आज तक आवाज नहीं उठाई है। रामराज का दावा करने वालों की सरकार की नाक के नीचे भी जनपद में नशे का कारोबार धडल्ले से चल रहा है। युवा वर्ग निरंतर इसका शिकार होकर अपना भविष्य नष्ट कर रहा है।
कुछ समय पूर्व पिरान कलियर में कई मेडिकल स्टोरों पर की गई छापेमारी के दौरान काफी मात्रा में नशीली दवाएं मिली थीं। उस समय कुछ मेडिकल स्टोर को सील किया गया था। इन स्टोर पर प्रोक्सीमन को ‘लाल छोड़ा‘, फोटबिन को ‘पानी‘ और इस्पेसी प्रोक्सीमन को ‘नीला छोड़ा‘ जैसे कोड वर्ड के नामों से बेचा जाता रहा। इनके अलावा रुड़की, कलियर एवं आस-पास के क्षेत्रों के मेडिकल स्टोरों पर उपरोक्त नशीली दवाओं के अलावा एलपेक्स, नीटो जोपम, डाइजीपाम, फलैडो एवं सिलोचन आदि नशीली दवाएं खुलेआम बेची जाती रही हैं। बताया जाता है कि इस गोरखधंधे की पूरी जानकारी पुलिस प्रशासन एवं संबंधित स्वास्थ्य विभाग को है, लेकिन वे अपने-अपने आर्थिक स्वार्थों की पूर्ति होने के कारण इस नशीले कारोबार को जानबूझकर नजरअंदाज करते हैं। आम चर्चा है कि जिन मेडिकल स्टोरों पर नशीली दवाइयां बिकती हैं उनसे संबंधित सरकारी विभागों को हर माह लाखों रुपए का चढ़ावा जाता है।
ऐसे आरोपों पर विश्वास इसलिए भी किया जाता है कि हाल में उन मेडिकल स्टोरों की सील खोलकर उन्हें चालू करा दिया गया जिन पर गत माह छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नशीली दवाएं एवं नशीले इंजेक्शन बरामद हुए थे। गत माह पंजाब के रहने वाले एक व्यक्ति को जब पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया तो उसने पूछताछ के दौरान बताया था कि वह नशीली दवाएं और इंजेक्शन कलियर स्थित मेडिकल स्टोर से खरीद कर लाता है। उसके बाद पुलिस ने कलियर स्थित मेडिकल स्टोर पर छापेमारी की। जिसमें भारी मात्रा में नशीली दवाओं के साथ नशीले इंजेक्शन बरामद होने पर मेडिकल स्टोर सील किए गए थे। लेकिन कुछ समय बाद ही उन मेडिकल स्टोरों की सील आखिर किस आधार पर खोल दी है यह सवाल हरिद्वार जिले में हर किसी की जुबान पर है। स्थानीय जागरुक लोगों का मानना है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि पता चल सके कि रुड़की, कलियर एवं आस-पास के क्षेत्रों में मेडिकल स्टोरों पर नशीली दवाओं का कारोबार किन-किन के सहयोग से चल रहा है। सबसे ज्यादा ताज्जुब की बात तो यह है कि कलियर में जिन मेडिकल स्टोरों से नशीली दवाएं बरामद हुईं थीं उनमें से किसी एक भी मेडिकल स्टोर का लाइसेंस आज तक निरस्त नहीं किया गया

…..साभार सन्डे पोस्ट