जीएसटी: दवा व्यापार में तैयारी के साथ आया एनपीपीए

नई दिल्ली: ड्रग रेग्युलेटर एनपीपीए ने जीएसटी लागू होने को लेकर तैयारी पूरी कर ली है। जीएसटी लागू होने के पहले एनपीपीए ने 761 जरूरी दवाओं की सीलिंग प्राइस जारी कर दी है। इसमें कैंसर, एचआईवी और डायबिटीज जैसी बीमारियों में भी इस्तेमाल होने वाली दवाएं है। एनपीपीए का कहना है कि सीलिंग प्राइस पहले से कम हुआ है, हालांकि जीएसटी लागू होने के बाद इन दवाओं की कीमत 3 फीसदी तक बढ़ या घट भी सकती है, जो अलग-अलग राज्यों पर आश्रित है। फिलहाल नई कीमत पर अगर मैन्युफैक्चरर्स को कोई आपत्ति है तो वे 29 जून तक शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
      बता दें कि जीएसटी पर ड्रग मैन्युफैक्चर्स की चिंताओं को लेकर एनपीपीए ने जरूरी दवाओं की सीलिंग प्राइस तय करने के लिए नया फॉर्मूला तैयार किया था। फार्मूले के तहत सीलिंग प्राइस नए सिरे से रिवाइज्ड किया गया है। जिसमें जीएसटी के तहत 12 फीसदी टैक्स का प्रावधान होगा। 12 फीसदी जीएसटी से दवाओं की कीमत पहले से 2.5 से 3 फीसदी तक बढ़ जाएंगी। बता दें कि जरूरी दवाओं पर अभी कुल मिलाकर 9 फीसदी टैक्स लगते हैं।
 
29 जून तक करेक्शन बता सकते हैं मैन्युफैक्चर्स
       एनपीपीए के चेयरमैन भूपेंद्र सिंह का कहना है कि एनपीपीए ने 761 जरूरी दवाओं की लिस्ट वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। मैन्युफैक्चर्स से कहा गया है कि वे इसे चेक कर लें और कोई करेक्शन हो तो 29 जून तक बता दें। जीएसटी लागू होने के बाद रिवाइज्ड सीलिंग प्राइस को नोटिफाई किया जाना है। उन्होंने बताया कि दवा कंपनियों की चिंताओं को देखते हुए नए सिरे से दवाओं के दाम तय किए गए हैं। असल एमआरपी कितनी बढ़ती है यह जीएसटी लागू होने के बाद क्लीयर होगा।
क्या है नया फार्मूला
      एनपीपीए के नए फार्मूले के तहत जरूरी दवाओं की एमआरपी के 65 फीसदी पर 6 फीसदी एक्साइज ड्यूटी कम होगी। इसके अलावा सीलिंग प्राइस पर 5 फीसदी लगने वाला लोकल टैक्स हट जाएगा। पुरानी एमआरपी से ये दोनों वैल्यू घटाने के बाद जो कीमत होगी, वह नई सीलिंग प्राइस होगी। इस प्राइस पर 12 फीसदी जीएसटी टैक्स लगेगा। यही फाइनल एमआरपी होगी। इस लिहाज से रिवाइज्ड सीलिंग प्राइस 95.095 रुपए होगी। इस पर 12 फीसदी जीएसटी लगेगा, जो 11.41 रुपए होगा। नई एमआरपी 107.31 रुपए होगी, जो पहले 105 रुपए थी। वहीं, बाकी दवाओं की कीमत हर साल 13 फीसदी बढ़ाने की इजाजत नहीं दी गई है। कंपनियां बाकी दवाओं की कीमत हर साल 10 फीसदी ही बढ़ा पाएंगी।
एनपीपीए ने मानी दवा निर्माताओं की बात
       इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन ने एनपीपीए से मुलाकात कर दवाओं के दाम बढ़ाने की मांग की थी। एसोसिएशन की दलील थी कि दवाओं पर जीएसटी दर 12 फीसदी होने से पुराने स्टॉक्स पर उन्हें काफी ज्यादा नुकसान झेलना पड़ेगा। एसोसिएशन ने एनपीपीए से दवाओं की नई कीमतें जल्द तय करने की भी सिफारिश की है। गौरतलब है कि अभी बिना जीएसटी के दवाओं पर 9 फीसदी टैक्स लगता है, जबकि जीएसटी के तहत ज्यादातर दवाएं 12 फीसदी स्लैब में होंगी।