दवा निर्माता, फार्मा फे्रंचाइजी, थर्ड पार्टी मैन्युफेक्चर, PCD फ्रेंचाइजी का काम करने वाले ध्यान से पढ़ें खबर

एमआरपी से अधिक दाम नहीं वसूल सकते, रेट बढ़ाए तो समाचार पत्र में देना होगा विज्ञापन
नई दिल्ली: जीएसटी लागू होने के बाद कमोडिटीज की सप्लाई और उनकी कीमतों पर नजर रखने के लिए सरकार ने कमेटी गठित की है। जीएसटी से जुड़े भ्रम दूर करते हुए राजस्व सचिव हसमुख अढिय़ा ने बताया कि अब तक 2 लाख 2 हजार लोगों ने जीएसटी के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है। उपभोक्ता मामलों के सचिव अविनाश श्रीवास्तव ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद रिटेल प्राइस में संशोधन हो सकता है। यदि एमआरपी से अधिक दाम होंगे तो मैन्युफेक्चर को दो अखबारों में सूचना देनी होगी और पैकेट पर रिवाइज एमआरपी लिखना होगा। दाम कम होने पर विज्ञापन देने की जरूरत नहीं है लेकिन रिवाइज एमआरपी अलग से लिखना अनिवार्य होगा। एमआरपी में सभी टैक्स शामिल होंगे। अलग से किसी तरह की टैक्स वसूली नहीं होगी।
    20 लाख से कम टर्नओवर वाले कारोबारियों से जीएसटी नहीं लिए जाने के सवाल पर अढिय़ा ने कहा कि थोक दुकानदार से रिटेलर को सामान बेचने पर ही सरकार को टैक्स मिल जाता है लेकिन कंपोजिशन या छूट हासिल करने वाले डीलर को इसकी जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि छोटे रिटेलर से टैक्स नहीं ले रहे हैं तो भी वह हमें थोक दुकानदार से सामान बिकने पर मिल चुका होता है।