एक्सपायर होने लगी दवाएं, जिम्मेदार कौन

ब्यावर। राजकीय अमृतकौर अस्पताल में बीपीएल दवा काउंटर बंद रहने से यहां रखी कई दवाइयांं एक्सपायर होने के कगार पर आ पहुंची हैं। कई दवाएं ऐसी भी हैं जिनका समय इसी माह के अंत तक पूरा हो जाएगा। इन दवाइयाों को अस्पताल के अन्य काउंटर पर उपलब्ध नहीं कराए जाने से मरीज इन्हें बाजार से खरीदने को मजबूर हैं। अस्पताल प्रबंधन सब-कुछ जानकर भी कोई कदम नहीं उठा रहा है।
     बता दें कि फार्मासिस्टों की कमी के चलते एकेएच में बना बीपीएल दवा काउंटर चार माह से बंद है। बीते दिनों मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने बीपीएल काउंटर के फार्मासिस्ट को बुलाकर उसे निर्देश दिए कि वह काउंटर पर रखी दवाओं को दूसरे काउंटर पर देकर वहां से एनओसी ले ले ताकि दवाएं एक्सपायर न हो और उनका स्टॉक भी मेंटेन रहे। फार्मासिस्ट ने दवाओं की लिस्ट बनाकर एक्सपायरी होने वाली दवाओं को दूसरे काउंटरों पर वितरित करने की सहमति भी दी, लेकिन उसके बाद से काउंटर को वापस नहीं संभाला गया है। ऐसे में काउंटर पर रखी कुछ दवाएं अवधि पार हो गई हैं तो कुछ अवधि पार के करीब है।
दवाओं के निस्तारण को लेकर गंभीर नहीं अस्पताल प्रबंधन
बीपीएल काउंटर पर रखी बैच नंबर वी-15338 की पचास से ज्यादा सिप्रोफ्लोक्सासीन और डैक्सामिथासोन इयर ड्रॉप इसी माह में एक्सपायर हो जाएगी। जबकि इन इयर ड्रॉप को लेकर अस्पताल प्रबंधन ने फार्मासिस्ट को निर्देश दिया था कि वो इन दवाओं का निस्तारण अन्य काउंटरों पर देकर करवा दे। लेकिन उसके बाद भी इयर ड्रॉप समेत अन्य दवाओं के निस्तारण को लेकर ना तो फार्मासिस्ट गंभीर दिख रहा है और न ही अस्पताल प्रबंधन। इस बारे में पीएमओ डॉ.एमके जैन का कहना है कि फार्मासिस्ट को निर्देश दिए हैं कि वो एक्सपायरी होने वाली दवाओं का समय पर निस्तारण कर दे। उसने काफी दवाएं हटा भी दी हैं। अगर कुछ दवाएं और होंगी तो उन्हें दूसरे काउंटरों पर देकर मरीजों को उपलब्ध करवा दी जाएगी।