फार्मेसी कॉउंसिल में अटके रजिस्ट्रेशन, मामला पहुंचा कोर्ट में

अम्बाला, बृजेंद्र मल्होत्रा। हरियाणा स्टेट फार्मेसी कॉउंसिल में अन्य राज्यों से डिप्लोमा या बैचलर इन फार्मेसी की पढ़ाई करने वालों को रजिस्ट्रेशन नहीं मिल रहा। आवेदकों ने लम्बा इंतजार करने के बाद जब भविष्य अधर में लटकता नजर आने लगा तो न्यायालय का द्वार खटखटाया। अपना पक्ष रखते हुए फार्मेसी कॉउंसिल ऑफ इंडिया को प्रथम पक्ष पार्टी बनाया कि जब फार्मेसी कॉउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा एफिलेटिड यूनिवर्सिटी/कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद रजिस्ट्रेशन नहीं मिलता तो ऐसे यूनिवर्सिटी या कॉलेज का क्या वजूद? इस बारे में फार्मेसी कॉउंसिल ऑफ इंडिया अपना स्टैंड स्पष्ट करें।
इस बारे फार्मेसी कॉउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा संदीप एवं अन्य के केस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अपने पत्र के माध्यम से 18 दिसम्बर 2019 को हरियाणा स्टेट फार्मेसी कॉउंसिल को लिखा कि जब आवेदकों ने भले ही दूसरे राज्य से 10+2 व डिप्लोमा इन फार्मेसी की पढ़ाई उनके (पीसीआई) द्वारा एफिलेटिड कॉलेज या यूनिवर्सिटी से की है, ऐसे में आपके पास रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है तो रजिस्ट्रेशन कर दें, बेवजह कानूनी पचड़ों में न पड़ें। पीसीआई की तरफ से अनुराधा (रजिस्ट्रार कम सचिव पदासीन हैं) द्वारा ये पत्र माननीय न्यायालय को भी प्रेषित किया है जिससे पीसीआई का स्टैंड तो स्पष्ट हो गया परन्तु हरियाणा स्टेट फार्मेसी कॉउंसिल अब क्या निर्णय लेती है यह तो भविष्य के गर्भ में है। दरअसल, रजिस्ट्रेशन की समस्या अन्य राज्यों के मुकाबले हरियाणा में अधिक देखने /सुनने को मिल रही है। फिलहाल तो रजिस्ट्रार का मामला भी न्यायालय के विचाराधीन है। यदि रजिस्ट्रार को न्यायालय से राहत शीघ्र मिल जाएगी तो रजिस्ट्रेशन के काम में आवेदकों को राहत मिल सकेगी।

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