ड्रग अधिकारी का कारनामा, मंथली के चकर में दे दी क्लीन चिट

झालरापाटन के स्टोर का रिकॉर्ड भी गड़बड़

कोटा। पूरे प्रदेश में अपने कारनामों को लेकर मशहूर जयपुर की फर्म कमला इंटरप्राइजेज पर छापे के बाद वहां से मिले दस्तावेजों के आधार पर झालावाड़ के ड्रग अधिकारी को झालरापाटन की एक मेडिकल स्टोर का निरीक्षण करने भेजा गया तो ड्रग अधिकारी ने बताया कि ऐसी कोई संदिग्ध दवा स्टोर पर नहीं मिली।
कुछ समय बाद दोबारा शिकायत जयपुर पहुंची तो कोटा से सहायक औषधि नियंत्रक (एडीसी) देवेंद्र गर्ग टीम के साथ पहुंचे। उन्हें कमला इंटरप्राइजेज द्वारा सप्लाई की गई संदिग्ध नकली दवा मिल गई। माना जा रहा है कि उस वक्त ड्रग अधिकारी ने निरीक्षण में गड़बड़ी की और इसी के आधार पर एडीसी ने झालावाड़ के डीआई नरेंद्र राठौर को नोटिस जारी किया है। एडीसी का कहना है कि मामले में डीआई की भूमिका ठीक नहीं लग रही,
क्योंकि ये दवाइयां नई सप्लाई की नहीं हैं। छापे के बाद फर्म ही बंद है तो अब सप्लाई आने का सवाल ही नहीं उठता।
जाहिर है, दवाइयां पहले की हैं, लेकिन तब निरीक्षण के बाद ड्रग अधिकारी ने रिपोर्ट में ओके कर दी। एडीसी ने बताया कि ड्रग कंट्रोलर के निर्देश पर झालावाड़ में विशेष निरीक्षण प्लान किया। संभागभर के डीआई की टीम के साथ रायपुर में सांवलिया मेडिकल स्टोर, ज्ञान मेडिकल स्टोर, सुनील मेडिकल स्टोर मनोहर मेडिकल स्टोर जांचा। सांवलिया मेडिकल स्टोर पर बिना क्रय बिल दवाइयां खरीदना पाया गया। इनमें तीन दर्द निवारक दवाइयां ऐसी भी मिलीं, जिनसे बैच नंबर, निर्माण एक्सपायरी की डेट मिटाई गई थी। इस पर इन्हें जब्त करके सैंपल लिया गया। शेष दुकानों पर भी क्रय-विक्रय बिलों के रिकॉर्ड में अंतर मिला।