सरकारी फैसले को कोर्ट में चैलेंज करेगा आईएमए

मध्य प्रदेश में आयुष डॉक्टरों को एलोपैथी दवा लिखने का अधिकार, दिल्ली में हाईकोर्ट की मनाही
भोपाल (म.प्र.): दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले दिनो एक फैसले में स्पष्ट किया था कि आयुष डॉक्टरों को एलोपैथी दवा लिखने की मनाही होगी। इससे जान का खतरा हो सकता है लेकिन राजधानी से करीब 800 किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश में आयुष डॉक्टरों को इसकी अनुमति दी गई है। आयुष डॉक्टर को केवल तीन महीने का कोर्स करना होगा और फिर वह आराम से एलोपैथी दवा लिखने का अधिकारी होगी। इसका विरोध करते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) फैसले को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रदीप सिंह चंदेल का तर्क है कि एक व्यक्ति पांच साल से अधिक की पढ़ाई करके एमबीबीएस डॉक्टर बनता है। ऐसे में आयुष डॉक्टरों को कैसे तीन महीने की ट्रेनिंग के बाद अंग्रेजी दवाइयों का ज्ञान हो जाएगा।
      आयुर्वेदाचार्य गोविंद माधव शुक्ला का कहना है कि पहले भी इंटीग्रेटेड कोर्स चलता था जिसमें आयुर्वेद के डॉक्टरों को अंग्रेजी दवाएं लिखने की अनुमति थी। अब डॉक्टरों की कमी के चलते सरकार ने ट्रेनिंग देकर अंग्रेजी दवाई लिखने का फैसला किया है तो इसमें गलत क्या है। पहले डॉक्टरों की कमी पूरी की जाए  फिर प्रतिबंध पर विचार होना चाहिए। इलाज सबसे पहले है, कानूनी लड़ाई बाद में।
         प्रदेश सरकार द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी देखते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ आयुष डॉक्टरों को एलोपैथी की ट्रेनिंग दी जाए। ट्रेनिंग के बाद उन्हें एलोपैथी दवा लिखने का पूरा अधिकार होगा। वहीं, दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले दिनों राजधानी में होम्योपैथी, आयुर्वेद और यूनानी पद्धति के चिकित्सकों को अंग्रेजी दवा लिखने की सख्त मनाही का फैसला सुनाया था।
      चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री शरद जैन बोले कि डॉक्टरों की कमी के कारण फैसला लिया गया है कि आयुष के डॉक्टर ट्रेनिंग के बाद अंग्रेजी दवाई लिख सकेंगे। हमारे पास अब तक कोई विरोध पत्र नहीं आया। दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले की जानकारी होने उन्होंने साफ इनकार किया।
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