सरकारी अस्पताल में चल रहा है प्राइवेट दवाओं का धंधा

मैनपुरी। उत्तरप्रदेश के मैनपुरी जिले के दन्नाहार थाना क्षेत्र में अगर रुटीन चेकअप के लिए भी कोई गर्भवती महिला अस्पताल पहुँचती है तो यहां चिकित्सक एक रुपये के पर्चे पर दवा लिखते हैं और बाद में 100 रुपये लेकर आयरन सिरप की बाटल पकड़ा देते हैं। शरीर में खून की कमी बताकर 100 रुपये में प्राइवेट कंपनी का आयरन सिरप की बाटल बेच दी जाती है। गुरुवार को भी गर्भावस्था की जांच के लिए पहुंचीं ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को महिला चिकित्सकों द्वारा ये सिरप बेचे गए। असल में सरकारी अस्पताल में प्राइवेट कंपनी की साठ-गांठ से दवाओं का यह धंधा लंबे समय से चल रहा है। जांच के लिए आने वाली महिलाओं को चिकित्सक द्वारा पहले खून की कमी बताई जाती है उसके बाद उन्हें फोलिक एसिड और आयरन की दवाएं और सिरप बेच दिए जाते हैं।

विरोध होते ही अस्पताल प्रशासन में खलबली मच गई। आनन-फानन में दवाओं को समेटा जाने लगा। सीएमएस डा. एके पचौरी ने इस पूरे मामले में जांच के निर्देश दिए हैं।इस कारोबार के पीछे मोटा मुनाफा छिपा है। दवा कंपनियां सरकारी डाक्टरों से साठ-गांठ करती हैं। उन्हें प्रिट रेट पर 50 फीसद कमीशन दिया जाता है। बदले में डाक्टरों को उनकी दवा बिकवानी होगी। महिला चिकित्सकों द्वारा बेचे जा रहे सिरप का प्रिट रेट 145 रुपये है। जबकि चिकित्सकों द्वारा इसे 100 रुपये में गर्भवती महिलाओं को बेचा जा रहा है। जितने सिरप बिकेंगे, उनका कमीशन चिकित्सक के पास पहुंच जाएगा।फेस्कार्बेट-एक्सटीजेड नामक में फेरस एस्कार्बेट और फोलिक एसिड का सस्पेंशन है। इसमें निर्माण तिथि जून 2019 दर्ज है।

दर्ज जानकारी के अनुसार यह सिरप नवंबर 2020 को एक्सपायर हो जाएगा। इससे पहले कि यह बर्बाद हो, महिला चिकित्सकों के माध्यम से मरीजों के बीच इसकी सस्ते दामों पर बिक्री कराई जा रही है। सीएमओ डा. एके पांडेय ने कहा कि सरकारी अस्पताल में सभी दवाएं सीधे शासन स्तर से मुहैया कराई जा रही हैं। जिसके लिए कार्पोरेशन बना हुआ है। मरीजों को मुफ्त उपचार की सुविधा है। यदि अस्पताल की महिला चिकित्सक दवाएं बेच रही हैं तो यह गंभीर बात है। इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। उच्चाधिकारियों के संज्ञान में भी मामला लाया जाएगा।