कानूनी मनाही के बाद भी बिना डॉक्टर की पर्ची के मेडिकल स्टोर्स पर धड़ल्ले से बिक रही दवा

सुपौल। कानूनी मनाही के बाद भी बिना डॉक्टर की पर्ची के मेडिकल स्टोर्स पर धड़ल्ले से दवा बेचीं जा रही है। सरकारी आदेशों के मुताबिक घबराहट, स्लिप, एप्रिया, कफ-खांसी आदि बीमारियों के इलाज में प्रयुक्त होने वाले टेबलेट, कैप्सूल, इंजेक्शन व सीरप डॉक्टरी पर्चे पर ही बेचने का प्रावधान है। बावजूद इसके बाजार में अल्प्राजोलम, कोडीन सिरप, स्पास्मो प्रोक्सप्योन, डायजापाम आदि दवा बिना चिकित्सक परामर्श के बेची जा रही है। बाजार क्षेत्र के साथ-साथ गांव में प्रतिमाह इनकी बिक्री चार से पांच लाख में है। इसका दुखद पहलू यह है कि इन दवाओं का सेवन करने वाले 10 से 30 वर्ष तक के आयु वर्ग के लोग हैं।

बता दें कि खांसी, कफ, मानसिक, घबराहट आदि के इलाज में उपयोग की जानेवाली दवा डॉक्टर के पर्चे बिना बेचे जाने की कानूनी मनाही के बाद भी अधिकतर दवा की दुकानों पर धड़ल्ले से बेची जा रही है। नशा करने वाले लोग इस तरह की दवा का खूब उपयोग कर रहे हैं। इनमें किशोर व युवा की संख्या अधिक होती है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लागू नैरोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज एक्ट के अनुसार कुछ दवा की बिक्री चिकित्सक परामर्श के बिना पूरी तरह से रोक है। गौरतलब है कि प्रतिबंधित दवा का सेवन करने वाले दवा खरीदने में कोड भाषा का प्रयोग करते हैं। नीले बादाम के नाम से प्रॉक्सीवॉन कैप्सूल, दस रुपये का रिचार्ज कूपन मांगने पर डायजीपॉम व एल्प्रेक्स टेबलेट आदि कोड का प्रयोग किया जाता है।

सुपौल के सिविल सर्जन – डॉ. कृष्णमोहन प्रसाद के मुताबिक इस तरह की दवा बिना डॉक्टर के परामर्श के बिक्री पर प्रतिबंध है। अगर इस तरह की दवा मेडिकल स्टोर पर बिना चिकित्सक के परामर्श के बेची जा रही है तो इसकी जांच करवाई जाएगी और दोषी पाए जाने पर ऐसे विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसी दवा का सेवन करने वाले अकेलापन, तनाव, पढ़ाई और काम में अरुचि, भूख ना लगना, शरीर कमजोर होना, बदन कांपना, आंखों लाल रहना, जुबान लड़खड़ाना, रात को नींद नहीं आना, चिरचिरापन, चोरी व झूठ बोलने की आदत पड़ना, स्मरण शक्ति कमजोर होने आदि का शिकार हो जाते हैं।

बाजार एवं गांव में आसानी से मिलने वाली प्रतिबंधित दवा से अभिभावक वर्ग चितित हैं। कुछ युवक ऐसी दवा खरीदने के लिए अनुचित कार्य कर रहे हैं क्षेत्र में चोरी आदि की घटनाओं में भी बढ़ोतरी हुई है। अभिभावकों का कहना है कि इसपर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो काफी संख्या में युवा अपने जीवन को अंधकारमय बना लेंगे।