आयुर्वेदिक दवाओं से होगा जानवर का इलाज, अंग्रेजी दवा के साइड इफेक्‍ट से बचेंगे पशु-पक्षी

पटना। आयुर्वेदिक दवाओं से पशु-पक्षियों का इलाज होगा। बताया जा रहा है कि अंग्रेजी दवा के साइड इफेक्‍ट से भी जानवर बचेंगे। बता दें कि आयुर्वेदिक दवाओं का पशु-पक्षियों पर क्या असर पड़ता है, अब बिहार में इस पर अध्ययन किया जाएगा। राजकीय आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीनेश्वर प्रसाद ने बताया कि डेयरी उद्योग में पशुओं के लिए बनाई गईं आयुर्वेदिक दवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका दोहरा फायदा हो रहा है, पहला जानवराें को बीमारियां कम होंगी और जानवरों से वायरस का संचार मनुष्यों में नहीं हो पाएगा। वहीं भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद की अपनी दवाएं खोजने से उसका सम्मान और बढ़ेगा।

गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग के आयुष विभाग और आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय पहले ही इसकी स्वीकृति दे चुका है। शुक्रवार को राजकीय आयुर्वेद कॉलेज और बिहार एनीमल साइंस यूनिवर्सिटी के बीच इसके लिए समझौता किया जाएगा। इस समझौते के बाद राजकीय आयुर्वेद कॉलेज में पशुओं के उपचार को बनाई गई दवाओं का परीक्षण एनिमल साइंस विश्वविद्यालय में किया जाएगा। एनिमल साइंस विवि के विशेषज्ञ जानवरों पर आयुर्वेदिक कॉलेज में विकसित दवाओं का परीक्षण कर उसके दुष्प्रभाव या फायदे का अध्ययन करेंगे। दवा को जो असर जानवरों पर होगा, विशेषज्ञ उसकी जानकारी आयुर्वेदिक कॉलेज की टीम को देंगे।

तमाम गंभीर रोगों के उपचार में आयुर्वेदिक पद्धति से बनी दवाएं देश दुनिया प्रभावी साबित हो रही हैं। इसे देखते हुए विशेषज्ञों ने पशु-पक्षियों के उपचार में आयुर्वेदिक दवाओं को आजमाने पर विचार किया। चूंकि इंसानों को होने वाले 70 फीसद संक्रमण किसी न किसी पशु या पक्षी से फैलते हैं। अंग्रेजी दवाओं से उनका इलाज तो हो जाता है, लेकिन उनका दुष्प्रभाव जानवरों से होते ही इंसानों तक पहुंचता है। इसके समेत तमाम पहलुओं को देखते हुए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने पशु-पक्षियों पर आयुर्वेदिक दवाओं का प्रभाव देखने का निश्चय किया। हालांकि, आयुष मंत्रालय ने सभी दवाओं को पशुओं पर परीक्षण के आधार पर साक्ष्य जुटाने और सफल होने पर दवाएं विकसित करने काे कहा।