फार्मा कंपनी फंसी : 500 एमजी गोली में 60 फीसदी दवा

मुरादाबाद: ड्रग विभाग द्वारा लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट में मुरादाबाद के प्रिंस रोड स्थित डीके फार्मा की आठ दवाएं फेल पाई गई। विभाग ने रिपोर्ट मिलने के बाद फार्मा कंपनी के दवा निर्माण से लेकर खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी। आवश्यक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट लखनऊ मुख्यालय भेज दी।

गौरतलब है कि ड्रग इंस्पेक्टर नरेश कुमार ने अक्टूबर 2016 में मेरठ के खैर नगर बाजार स्थित मेडिकल स्टोर पर छापा मारा था। यहां से मुरादाबाद की डीके फार्मा कंपनी में निर्मित पेरासीटामोल, डिकाजॉल, निमुस्लाइड, ऑक्साटेट्राइसाइक्लिन, डेक्जामेथसॉन, फेमोटीडीन, आइबोब्रोफीन समेत आठ टेबलेट और कैप्सूल के नमूने लिए थे। दरअसल, विभाग को सूचना मिली थी कि डीके फार्मा की कई दवाएं गुणवत्ताविहीन है। नमूनों को लखनऊ स्थित राजकीय विश्लेषक को जांच के लिए भेजा गया था। दस माह बाद जब रिपोर्ट सामने आई तो पता चला कि पर्याप्त मात्रा में दवा मौजूद ही नहीं थी। विश्लेषकों की मानें तो 500 एमजी की गोली में दवा की मात्रा सिर्फ 60 फीसदी मिली।

चिकित्सकों के मुताबिक, टेबलेट या कैप्सूल में दवा की मात्रा कम है तो उसका साइड इफेक्ट तो नहीं होगा लेकिन दवा मरीज पर असर भी नहीं करेगी। यही वजह है कि कई बार मरीज जब शिकायत करता है कि दवा असर नहीं कर रही तो दूसरी दवा बदलकर लिख देते हैं।

ड्रग विभाग की इस कार्रवाई से दवा कारोबारियों में हलचल है। पता चला है कि ड्रग विभाग जिले की अन्य कई दवा दुकानों पर भी छापेमारी करने की तैयारी में ताकि नकली दवाओं की बिक्री जड़ से समाप्त हो सके। विभाग की तरफ से दवा दुकानदारों को हिदायत दी है कि गुणवत्तापरक दवा ही बेचें।