फार्मा कंपनियां नहीं भेज रही दवाईयां, प्राइवेट केमिस्टों का सहारा

फर्रुखाबाद। फार्मा कंपनियों द्वारा दवाईयां आपूर्ति नहीं करने के चलते डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में पिछले आठ दिन से दवाएं नहीं हैं। रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सीएमएस अन्य सरकारी अस्पतालों से जरूरी दवाइयां लोन लेकर काम चला रहे हैं। हालत यह है कि एस्प्रिन की गोलियां भी अस्पताल में नहीं है। सीएमएस की मानें तो जिन कंपनियों से दवाएं खरीदी जाती थीं, वे आपूर्ति नहीं कर पा रहे। अब मरीजों का इलाज तो करना है, इसलिए डॉक्टर बाजार की दवाएं लिख रहे हैं।

लोहिया अस्पताल के डॉक्टर मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि अस्पताल में जरूरी दवाओं का टोटा है। औषधि भंडार के प्रभारी डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि अस्पताल में सिट्रीजीन, एस्प्रिन, पैरासिटामॉल, डीएनएस की बोतलें, एल्वांडाजॉल और एंटीरैबीज इंजेक्शन समेत कई दवाएं खत्म हो चुकी हैं। लोहिया अस्पताल की महिला यूनिट से 200 बोतल डीएनएस लोन लेकर काम चलाया गया। 20 हजार एल्वांडाजॉल टेबलेट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लिंजीगंज से लोन ली गईं। एंटीबायटिक की 20 हजार गोलियां और सिप्रोफ्लोक्सेक्सिन एंटीबॉयटिक की 25 हजार गोलियां केंद्रीय औषधि भंडार से लोन ली गईं। पैरासिटामॉल की पांच हजार गोलियां महिला यूनिट से, एंटी रैबीज इंजेक्शन के 150 वॉयल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरौन से लोन पर लिए गए। केंद्रीय औषधि भंडार से तीन बार में एंटी रैबीज इंजेक्शन के 350 वॉयल पहले ही लोन पर लिए जा चुके हैं।

मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. बीबी पुष्कर की मानें तो एक महीने से दवा कंपनियों को आर्डर भेजे गए हैं लेकिन दवाओं की आपूर्ति नहीं की गई हैं। प्रमुख सचिव को भी इसकी जानकारी दी गई तो उन्होंने दूसरी कंपनियों को आर्डर भेजने की बात कही तो वहां भी आर्डर भेज दिए गए हैं।