एनपीपीए का अभी नोटिस, जरूरत पड़ी तो कानूनी कार्रवाई

नई दिल्ली: एनपीपीए ने 10 प्रमुख कंपनियों को कारण बताओं नोटिस जारी किया है इनमें सन फार्मा, लुिपन, कैडेला हेल्थकेयर, सिपला, डॉ. रेड्डी जैसी बड़ी फार्मा कंपनियों के भी नाम है। इन कंपनियों ने अथॉरिटी के बार-बार कहने के बावजूद ऑनलाइन डाटाबेस में अपने प्रोडक्ट की जानकारी नहीं दी है। बता दें की अथॉरिटी एनपीपीए दवा कीमतों पर नियंत्रण रखने वाली संस्था हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अथॉरिटी आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत इन कंपनियों पर जुर्माना लगा सकती है। नियम का पालन नहीं करने वाली दूसरी कंपनियों को भी नोटिस भेजने की तैयारी है। इस केस मे एनपीपीए और दवा कंपनिया पार्टी है। एनपीपीए चेयरमैन भूपेंद्र सिंह ने यह जानकारी दी। अथॉरिटी के पास दवाओं की कीमतें तय करने का अधिकार है, ताकि कंपनियां जरूरी दवाओं की ज्यादा कीमत वसूल सके। इसमें पारदर्शिता लाने के लिए कंपनियों की तरफ से एनपीपीए के ऑनलाइन डाटाबेस पर अपने प्रोडक्ट की जानकारी देना जरूरी है। एनपीपीए चेयरमैन ने बताया कि अथॉरिटी ने सितंबर 2014 में सभी दवा कंपनियों से इंटीग्रेटेड फार्मास्यूटिकल्स डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (आईपीडीएमएस) पर अपने प्रोडक्ट की जानकारी देने को कहा था। इसकी आखिरी तारीख कई बार बढ़ाई गई, फिर भी कंपनियों ने सूचना नहीं दी। अथॉरिटी का मानना है कि कंपनियों ने जानबूझकर आदेश का उल्लंघन (विलफुल वायलेशन) किया है। एनपीपीए ने इस सिलसिले में अपनी वेबसाइट पर नोटिस जारी किया है। इसमें कहा गया है कि जरूरी हुआ तो कंपनियों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे। नियामक ने दवा संगठनों से भी कहा है कि वे अपने सदस्यों को आदेश का पालन करने के लिए कहें।
Around 646 companies out of a total 5,000, and 56,400 formulations out of a total 1,00,000, have registered with the NPPA.