दिल्ली में आम आदमी दवा खाएं या जहर, सरकार को क्या

  • 31 औषधि नियंत्रण अधिकारियों की जरूरत, सेवा में सिर्फ 14
  • दवा और फूड जांच के लिए मात्र एक प्रयोगशाला 
 नई दिल्ली: जो दवा खा रहे हैं क्या वह सही है? नई दिल्ली खाद्य एवं औषधि प्रशासन के पास इसका कोई जवाब नही क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में औषधि नियंत्रण अधिकारियों की कमी है जो कि थोक एवं खुदरा दवा विके्रताओं और दवा निर्माताओं का निरीक्षण करें।
खुदरा एवं थोक दवा विके्रताओं को दवा बेचने का लाइसेंस जारी करने के पूर्व अनेक प्रकार की औपचारिकताए पूरी करनी होती है। औषधि नियंत्रण अधिकारियों की कमी के चलते इस प्रक्रिया पर भी पूरी तरह से नजर रखना संभव नही है। लाइसेंस जारी करने के पूर्व दुकान का पूरी तरह निरीक्षण किया जाता है कि वह ड्रग्स एवं कॉस्मेटिक एक्ट के अनुसार सभी शर्तों को पूरा करती है या नही। अनेक दवाईयां ऐसी हंै, जिन्हें फ्रिज में रखना जरूरी है क्योंकि उन्हें उचित तापमान मे ही सुरक्षित रखा जा सकता है।
इस समय नई दिल्ली में 18000 रिटेल एवं होलसेल लाइसेंस, 63 एलोपैथिक दवा निर्माता , 6 होम्योपैथिक दवा निर्माता वह 500 कास्मेटिक निर्माता है इतना ही नहीं राष्ट्रीय राजधानी में 62 रक्त कोष के निरीक्षण का जिम्मा भी इन्हीं अधिकारियों के ऊपर है। वर्तमान में राष्ट्रीय राजधानी में 31 औषधि नियंत्रण अधिकारियों की जरूरत है लेकिन सेवा में 14 ही है। अधिकारियों की कमी के साथ दिल्ली मे दवाओं की गुणवत्ता जांचने के लिए केवल एक ही प्रयोगशाला है और खाद्य वस्तुओ की जांच की जिम्मेदारी भी इसी प्रयोगशाला पर है। सवाल यह उठता है कि ऐसी स्थिति मे दवा के कारण कोई अनहोनी होती है तो उस स्थिति मे सही मार्गदर्शन कैसे होगा गलती दवा खाने वाले की थी या दवा देने वाले की या दवा निर्माता की।
पूरी दिल्ली के औषधि नियंत्रण अधिकारी दवा विक्रेताओं और दवा निर्माताओं से जो नमूने लेते है उन दवा के नमूनो की जांच के लिए उत्तर-पश्चिम दिल्ली लारेंस रोड पर केवल एक ही प्रयोगशाला है। वर्ष 2005 में गठित डॉ. माशेलकर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार 200 दवा विके्रताओं पर वह 50 दवा निर्माताओं पर एक अधिकारी का होना जरूरी है लेकिन 11 साल बीतने के बाद भी स्थिती मे कोई सुधार नही हुआ अगर कमेटी की रिपोर्ट को सही माने तो दिल्ली को 102 औषधि नियंत्रण अधिकारियों  की आवश्यकता है।
सूत्रों की मानें तो 7 ड्रग अधिकारियों की नियुक्तिप्रक्रिया चल रही है, लेकिन कागजों में। यदि इनको नियुक्ति मिल भी जाती है तो भी 10 अधिकारियों के काम का बोझ किसके कंधे पर होगा, यह बड़ा सवाल है। गर्मी के मौसम में को ध्यान मे ंरखते हुए इस विभाग की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है यदि कोई बड़ा हादसा खाने-पीने की वजह से हो गया तो जिम्मेदारी किसकी होगी?