कैंसर मरीजों के लिए गुरुग्राम (गुडग़ांव) में कपाट बंद

चंडीगढ़: साइबर सिटी गुडग़ांव को गुरुग्राम जैसे पवित्र नाम से तो मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर अलंकृत कर गए, लेकिन गुरुग्राम बनते ही इस जिले के सिविल अस्पताल में कैंसर मरीजों के लिए दरवाजे पूरी तरह बंद हो गए हैं। यहां सर्जन के रिजाइन देने के बाद से वार्ड को बंद कर दिया गया है और मौजूद स्टाफ को अन्य विभागों में लगा दिया गया है। हैरत की बात यह है कि सर्जन के रिजाइन किए जाने के बाद भी एक महीने में यहां दूसरे सर्जन को भेज वार्ड को बंद न होने के दावे किए जा रहे थे, लेकिन यह दावे केवल फाइलों तक ही सीमित रह गए। यहां प्रतिदिन औसतन 10 से 12 मरीजों की ओपीडी होती थी। ऐसे में जिन मरीजों का कैंसर का इलाज सिविल अस्पताल से चल रहा था, वह अधर में लटक गए हैं। अब उन्हें मजबूरन रोहतक मेडिकल कॉलेज या प्राइवेट हॉस्पिटल की ओर रुख करना होगा। सिविल अस्पताल में वर्ष 2007 में कैंसर वार्ड की शुरूआत की गई थी। यहां सर्जन ने स्वास्थ्य विभाग से अपनी जिद पर यह वार्ड शुरू करवाया था। इसके बाद से यहां कैंसर की जांच करने के बाद उनका इलाज करना व ऑपरेशन तक किए जाते थे। यहां प्रत्येक महीने औसतन 300 मरीज इलाज के लिए ओपीडी में आते थे। इनमें से प्रतिमाह करीब 60 मरीज ऐसे होते थे, जिन्हें अस्पताल में एडमिट करने की आवश्यकता होती थी। इसके अलावा हर महीने औसतन 6 मरीजों का कैंसर ऑपरेशन कर उन्हें नई जिंदगी दी जाती थी। यहां विभिन्न जिलों व राज्यों से मरीज कैंसर ऑपरेशन के लिए आते थे, लेकिन जनवरी में यहां कार्यरत सर्जन ने एक प्राइवेट क्लीनिक शुरू करने के साथ ही रिजाइन दे दिया। इसके लिए निर्धारित 90 दिन का नोटिस पीरियड भी दिया गया, जो 15 अप्रैल को समाप्त हो गया।
इस बारे में सिविल सर्जन डॉ. रमेश धनखड़ को दो-तीन दफा मोबाइल पर संपर्क किया, लेकिन बैठक की व्यस्तता के कारण वह फोन नहीं उठा सके।