‘मुफ्त’ के मारे बढ़ रहा दर्द

  • उत्तर प्रदेश और बिहार के बोझ से कराह रहा एम्स
  • राज्य में स्वास्थ्य सुविधाएं अच्छी नहीं: डॉ. एमसी मिश्र 
नई दिल्ली: इस देश में लोग सब कुछ मुफ्त में चाहते हैं, और यह बात स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए ठीक नहीं। यह कहना है अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. एमसी मिश्र का। एम्स की चिकित्सा व्यवस्था में खामियों के लिए डॉ. मिश्र उत्तर प्रदेश और बिहार को ज्यादा जिम्मेदार मानते हैं। स्वास्थ्य सुधार में कमी का ठीकरा उन्होंने नेताओं के सिर भी फोड़ा। मिश्र बोले कि स्वास्थ्य चुनावी मुद्दे से परे होता है, जिस कारण वह निरंतर बिगड़ रहा है।
डॉ. एमसी मिश्र औद्योगिक संगठन एसोचैम के ‘सबको स्वास्थ्य सुरक्षा’ कार्यक्रम में शामिल हुए। अपने संबोधन में कहा, उत्तर प्रदेश की 20 सालों की सरकारें राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में मजबूत और बुनियादी बदलाव नहीं कर पाई। स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए वह रेफरल सिस्टम और यूनिवर्सल स्वास्थ्य बीमा को कारगर हथियार मानते हैं।
अपने अनुभव साझा करते हुए डॉ. मिश्र बोले, वर्ष 1980 में जब वह एम्स आए तो उस समय उत्तर प्रदेश से बहुत कम मरीज आते थे। आज एम्स में हर साल 30 लाख मरीज आते हैं, इसमें से 22 फीसदी उत्तर प्रदेश से मरीज पहुंचते हैं। 11 फीसद बिहार और 11 फीसद हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों से आते हैं।
चिकित्सा सुधार के लिए उन्होंने सुपर स्पेशिएलिटी केयर हेतु सार्वजनिक निजी भागदारी, बुजुर्गो के लिए बीमा योजना, यूके (यूनाइटेड किंगडम) की तर्ज पर यूनिवर्सल स्वास्थ्य बीमा जैसे कुछ उपायों पर जोर दिया।