हरियाणा में हर वर्ष 22 हजार लोग कैंसर की गिरफ्त में

-कैंसर एटलस विकसित कर देश में चौथा राज्य बना हरियाणा
नई दिल्ली: हरियाणा में करीब 22 हजार लोग हर वर्ष कैंसर से पीडि़त होते हैं, यदि कैंसर की समय रहते पहचान हो सके तो करीब एक तिहाई मरीजों को पूरी तरह ठीक तथा एक तिहाई मरीजों को सुरक्षित किया जा सकता है। यह बात राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने हरियाणा में कैंसर एटलस के विकास पर आयोजित  सेमिनार में कही।
   उन्होंने कहा कि जून 2015 में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डïा को पत्र लिखकर कैंसर रोगियों की जांच के लिए विशेष प्रबंध करने की अपील की थी। साथ ही कैंसर सहित विभिन्न बीमारियों के उपचार के लिए समेकित राहत कोष स्थापित करने की भी अपील की थी। इसी के फलस्वरूप केंद्र सरकार के राष्ट्रीय कैंसर पंजीकरण कार्यक्रम के तहत हरियाणा में कैंसर एटलस को विकसित किया जा रहा है। हरियाणा इस प्रकार के कार्यक्रम को संचालित करने वाल देश का चौथा राज्य बन गया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हरियाणा में कैंसर उपचार के लिए झज्जर के बाढ़सा में राष्ट्रीय कैंसर संस्थान का निर्माण करवाया जा रहा है इसी प्रकार बीपीएस राजकीय मेडिकल कॉलेज खानपुर कलां, शहीद हुसैन खां मेवाती राजकीय मेडिकल कॉलेज नल्हर मेवात तथा कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज करनाल में कैंसर के उपचार की व्यवस्था है।
अनिल विज ने कहा कि कैंसर एटलस के विकसित होने से प्रदेश में कैंसर के रोगियों की संख्या, क्षेत्र, लिंग तथा कैंसर के प्रकार का पता लगाने में आसानी होगी। इसके पश्चात ऐसे रोगियों के उपचार की उचित व्यवस्था की जाएगी।
इस कार्यक्रम के तहत प्रदेश के सभी मरीजों को पंजीकृत किया जाएगा। इसके अलावा कैंसर के रोगियों की वास्तविक संख्या, क्षेत्र इत्यादि का पता लगाने के लिए दो प्रकार से प्रयास किये जाते हैं। इसके अन्तर्गत कैंसर के रोगियों का जनसंख्या एवं अस्पताल पर आधारित पंजीकरण किया जाएगा। प्रदेश के सभी निजी व सरकारी अस्पतालों को भी निर्देश जारी किये जाएंगे ताकि उनमें आने वाले सभी कैंसर के मरीजों का पंजीकरण हो तथा इसकी सूचना संबंधित अधिकारी को समय उपलब्ध करवा सकें। इससे प्रदेश के सभी मरीजों की संख्या, उनके लिंग, कैंसर का प्रकार तथा क्षेत्र की पूरी जानकारी विभाग के पास पंजीकृत हो सकेगी।

         स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके महापात्रा, सभी मेडिकल कॉलेज के निदेशक, सीएमओ, एम्स, फोर्टिस तथा आईसीएमआर बेंगलूरु के सदस्यों ने भी अपने अनुभव साझा किए।