‘खर्चा रुपया, भरोसा अठन्नी भी नहीं’

अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय की ताजा रिपोर्ट में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का सच
नई दिल्ली: अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय की ताजा रिपोर्ट की मानें तो दिल्लीवासियों का भरोसा सरकारी अस्पतालों में बढ़ रहा है। वहीं हरियाणा का लगभग आधा हिस्सा एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में होने के बावजूद यहां मरीज सरकारी अस्पतालों का रुख करने में गुरेज करते हैं, वह भी तब जब हरियाणा मरीज पर सरकारी खर्च के मामले में दिल्ली से आगे है।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय द्वारा तैयार की गई ‘दिल्ली में स्वास्थ्य पर सामाजिक उपभोग की रिपोर्ट (जनवरी-जून 2014)’ जारी की। रिपोर्ट में बताया गया कि राजधानी में प्रति हजार बीमार व्यक्तियों में 48 ग्रामीण और 50 शहरी क्षेत्रों के होते हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्र में 89 और शहरी क्षेत्र में 118 का है। वहीं, शहरी क्षेत्र के मरीजों की संख्या पंजाब में 170, हरियाणा में 75, हिमाचल प्रदेश 51, जम्मू-कश्मीर 41, राजस्थान में 83, उत्तर प्रदेश में 91 और गुजरात में 103 है।
दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में भी शहरी क्षेत्र आगे रहा। यहां अस्पताल में भर्ती (बच्चे के जन्म सहित) प्रति हजार जनसंख्या में 41 शहरी क्षेत्र से संबंध रखते हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 49 का है। रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने कहा कि दिल्ली में अस्पताल में भर्ती मरीज पर (शहरी क्षेत्र) सरकार औसतन 24,952 रुपये खर्च कर रही है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आकड़ा 26,455 रुपये है। हरियाणा में यह आंकड़ा 35,217 रुपये, हिमाचल प्रदेश में 31,160 रुपये, उत्तर प्रदेश में 33,402 रुपये और पंजाब में 31,978 रुपये है। दिल्ली में करीब 51 फीसद मरीज सरकारी अस्पताल में भर्ती होते हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा महज 32 फीसदी है। इस आंकड़े से दिल्ली की स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर होने के दावे को बल मिलता है। माना जा रहा है कि राजधानी के लोग अन्य राज्यों की अपेक्षा सरकारी अस्पतालों पर अधिक भरोसा करते हैं।