मैक्स रिलीफ हेल्थकेयर कंपनी की दवा पर लगा प्रतिबंध

ग्वालियर। कोविड संक्रमण के उपचार के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली फैवीमैक्स की नकली टेबलेट का मामला सामने आने के बाद अब दवा निर्माता कंपनी मैक्स हेल्थकेयर की अन्य चार दवाओं की बिक्री और इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है। ग्वालियर के महादेव मेडिकल एंड सर्जिकल से जब्त टेबलेट के अलावा अन्य दवाओं के सैंपल भी सोमवार को जब्त कर जांच के लिए भोपाल लैब भेजे गए हैं।

मध्यप्रदेश खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को एक बार फिर उड़ीसा से नई जानकारी मिली थी। इसकी सूचना ग्वालियर संभागायुक्त को मिली तो उन्होंने औषधि निरीक्षक को पुन: दवा बनाने वाली कंपनी की अन्य दवाओं के सैंपल लेने के निर्देश दिए। इसके बाद सोमवार को कार्रवाई की गई। इससे पहले फेवीमैक्स की नकली टेबलेट मामला उड़ीसा में सामने आया था। यह दवा उड़ीसा से ग्वालियर के लश्कर क्षेत्र स्थित महादेव मेडिकल एंड सर्जीकल पर भेजी गई थी। औषधि निरीक्षक ने यहां से 250 टेबलेट जब्त की थीं, साथ ही 320 टेबलेट के सैंपल लिए थे। इनको जांच के लिए भोपाल भेजा गया। इस बीच दवा की सप्लाई का पता लगाने बिलों की पड़ताल की गई। इसमें मालूम चला कि ग्वालियर से दतिया और सागर जिलों के मेडिकल स्टोर्स पर भी यह दवा भेजी गई है।

फेवीमैक्स की नकली टेबलेट के सैंपल लिए गए थे। इसके अलावा औषधि निरीक्षक ने दवा निर्माता कंपनी मैक्स रिलीफ हेल्थकेयर की अन्य दवाओं जैसे मेडॉक्सी 300, स्नीज, मेडिथ्रल 500 और सीफिटाजोब दवाआों के सैंपल भी लिए थे। इनको भी भोपाल लैब भेजा गया है। ग्वालियर से सागर और दतिया जिलों में भी सप्लाई की गई हैं। दोनों जिलों में 6 हजार टेबलेट भेजी गई हैं। इन दवाओं की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए वहां के औषधि निरीक्षकों को जानकारी भेज दी गई है।

औषधि निरीक्षक दिलीप अग्रवाल ने बताया कि मैक्स हेल्थकेयर कंपनी की दवाएं बेचने से रोक दिया गया है। संबंधित स्टॉकिस्ट से अन्य विक्रेताओं को भेजी गई दवा वापस बुलाने को कहा गया है। इस कंपनी की दवा अन्य जिलों में भेजने की जानकारी सामने आई है। संबंधित फर्म के बिलों की प्रतिलिपि व्हाट्सएप के माध्यम से तत्काल वहां के औषधि निरीक्षकों को भेज दी गई है।

हिमाचल प्रदेश की मैक्स हेल्थकेयर ने कोरोना के इलाज में दी जाने वाली फेवीमैक्स टेबलेट तैयार कर देशभर में बेचीं। उड़ीसा में इस टेबलेट की शिकायत आई तो वहां औषधि प्रशासन ने इसके सैंपल कराकर जांच के लिए भेजे। इसमें दवा नकली होने का पता लगा। इसके बाद वहां से जिन राज्यों और शहरों में दवा सप्लाई की गई, उनको जानकारी दी गई। इसके बाद ग्वालियर में भी छापा मारकर दवा को जब्त किया गया।