वायरस की तरफ फ़ैल रहा नकली दवा कारोबार, मेरठ से आठ राज्यों में पंहुचा

मेरठ। नकली दवा कारोबार लगातार बढ़ता ही जा रहा है। एक राज्य से दूसरे राज्य ही नहीं बल्कि अब ये कारोबार 8 राज्यों में फ़ैल चूका है। वायरस की तरफ फ़ैल रहा नकली दवा का कारोबार बढ़ता ही जा रहा है। बताना लाजमी है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खासकर मेरठ नकली दवाओं का अड्डा बन गया है। कोरोना दौर में ही मेरठ में बनाकर करोड़ों रुपये की नकली दवाएं आठ से ज्यादा राज्यों में खपा दी गईं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से वेस्ट यूपी में मेरठ प्रमुख जिला है। यहां तमाम दवा कंपनियां हैं। प्रमुख दवा मार्केट है।

तीन-तीन मेडिकल कॉलेज समेत अस्पताल और डॉक्टरों की लंबी-चौड़ी फौज है। करीब 14 जिलों के मरीज मेरठ में ही इलाज कराने आते हैं। ऐसे में दवाओं की खपत भी अन्य जिलों की अपेक्षा यहां कई गुना ज्यादा है। खपत ज्यादा होने से बिक्री में प्रतिस्पर्धा भी ज्यादा है। ऐसे में यहां नकली दवाइयां बनाने वालों का गोरखधंधा भी खूब फल-फूल रहा है। यहां बनने वाली दवाएं उप्र, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र समेत कई और राज्यों में सप्लाई होती हैं।

–काला कारोबार–

दवा से लेकर प्रोटीन तक नकली

हाईड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन, फैवीमेक्स, फेविपिराविर, अल्ट्राटेक पेनकिलर, यूरीमेक्स डी.मोनोसेफ, डिस्पोवेन इंजेक्शन, पेरासिटामोल, डाईक्लोफिनेक के नाम पर मेरठ में नकली दवाएं बनती हैं। यहां से नकली प्रोटीन भी पंजाब तक सप्लाई होता है।

रेमडेसिविर भी नकली

बागपत में 19 मई को 60 रेमडेसिविर पकड़े गए जो पंजाब के मोहाली से लाए गए थे। लखनऊ लैब से आई जांच में ये इंजेक्शन नकली पाए गए। मुंबई के गोरेगांव इलाके में मई में करीब 85 लाख रुपये की कोरोना की दवाएं भी नकली मिली थीं, जो मेरठ से भेजी गई थीं।

सवाल

दवाएं नकली तो असर कैसे

जिला मेरठ ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल ने दो साल पहले कहा था कि एंटीबायोटिक दवाएं कम असर कर रही हैं। अब ड्रग विभाग व पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है तो यह बात साफ हो रही है कि जब दवाएं नकली बनेंगी तो वह पूरा असर कैसे करेंगी?

–कार्रवाई–

आठ गिरफ्तार, 70 लाख की नकली दवाइयां बरामद

ड्रग इंस्पेक्टर पवन शाक्य के अनुसार, एक अप्रैल 2020 से 25 जून 2021 तक 17 छापामार कार्रवाई की गई। आठ लोगों को गिरफ्तार किया। इनसे करीब 70 लाख रुपये कीमत की नकली दवाइयां बरामद की। इसमें वे दवाइयां शामिल नहीं हैं जो बाहरी राज्यों की पुलिस अपने साथ ले गई थी।

तीन महीने, तीन बड़ी कार्रवाई

1- 19 मार्च को पंजाब पुलिस ने परतापुर क्षेत्र में फार्मास्युटिल कंपनी पर छापा मारा। कंपनी मालिक और मेडिकल स्टोर संचालक समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया। करीब 11 करोड़ रुपये कीमत की प्रतिबंधित दवाएं बरामद की।

2- 6 जून को मुंबई पुलिस ने धीरखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में एक दवा कंपनी पर छापा मारकर उसके मालिक को गिरफ्तार किया। यहां कोरोना की नकली दवाएं बनती थी। नोएडा में उनकी पैकिंग होकर कई राज्यों में भेजी जाती थीं।

3- 25 जून को ब्रहम्पुरी के साईंपुरम में प्रिंटिंग प्रेस पर पुलिस ने छापा मारा। 21 हजार नकली गोलियां, 120 इंजेक्शन व बड़ी संख्या में नामचीन कंपनियों के डुप्लीकेट रैपर मिले। यह सिंडिकेट कई शहरों से जुड़ा हुआ था।