कोरोना को मात देने वाली दवा ही बच्चों की बनी दुश्मन, 17 बच्चों की मौत

जयपुर। कोरोना संक्रमण के बाद उससे लड़ने के लिए बच्चों को दी जा रही एंटी बॉडी अब एक बड़ी समस्या बन कर खड़ी हो गई है। कोरोना के मुकाबले के लिए बच्चों को एंटी बॉडी वैक्सीन लगाई जा रही है जिसके चलते संक्रमण तो खत्म हो रहा है। लेकिन पोस्ट कोविड से जूझ रहे बच्चों में हाई कोविड एंटीबॉडी अब बच्चों की जान की दुश्मन बन रही हैं। हाई एंटी बॉडी या इम्यन सिस्टम के हाईपर एक्टिव कर देने से मल्टी सिस्टम इंफलमेंट्री सिंड्रोम के शिकार बच्चे हो रहे हैं।

दरअसल ये बीमारी अब देश भर में फैल रही है। राजस्थान के साथ ही अब दिल्ली, गुजरात, केरल और पंजाब में भी बच्चे इससे पीड़ित मिल रहे हैं। इसको लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों को अलट भी किया है। इंडियन अकेडेमी ऑफ पीडियेट्रिक्स इंटेसिव केयर के मुताबिक देशभर में दो हजार से अधिक बच्चे एमआईएस से पीड़ित हैं।

जयपुर की बात की जाए तो पिछले दो महीने में 17 बच्चों की मौत इस बीमारी के चलते हो गई है और देश में 2 हजार से ज्यादा बच्चे एमआईएस से पीड़ित हैं।
जयपुर के जेकेलॉन अस्पताल की बात की जाए तो पोस्ट कोविड के शिकार बच्चों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ये सभी एमआईएस से पीड़ित है। जानकारी के अनुसार अभी तक 154 बच्चे इस बीमारी से पीड़ित होकर अस्पताल में आ चुके हैं और इनमें से 17 की जान चली गई है।

अधिकतर को पता नहीं की कोरोना हुआ
चिंता की बात ये है कि एमआईएस के शिकार वे बच्चे अधिक हो रहे हैं जिनमें कोरोना के हल्के लक्षण थे और वे ठीक हो गए। अधिकतक परिजनों को पता ही नहीं है कि उनके बच्चों को कोरोना भी हुआ था। अब ये बच्चे हाई एंटॉ बॉडी बनने से ये बच्चे पोस्ट कोविड में एमआईएस के शिकार हो रहे हैं। आसान भाषा में शरीर में एंटीबॉडी ज्यादा बनने लगती है तो कोरोना से तो बच जाते हैं लेकिन शरीर के अन्य अंगों को नुकसान पहुंचता है। एक तरह से ये एंटीबॉडी का आउटब्रेक है। शरीर का इम्यून सिस्टम ही शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है।

तो बढ़ जाएगा मौत का खतरा
जेकेलोन अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक गुप्ता ने बताया कि एमआईएस इतना खतरनाक है कि समय पर अस्पताल न लाने पर मौत का खतरा बढ़ जाता है। अब तक 17 बच्चों की इससे मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि चौंकाने वाली बात ये है कि कोरोना से ठीक होने के एक से छह सप्ताह में इसके लक्षण आने लगते हैं। वहीं अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ मनीष शर्मा ने बताया कि इस बीमारी का पता आरटीपीसीआर टेस्ट और कोविड एंटी बॉडी टेस्‍अ के जरिए होता है। समय पर यदि पीड़िता को अस्पताल लाया जाता है तो ये आसानी से ठीक हो जाता है लेकिन देर होने पर मौत भी हो सकती है।