कोरोना की दूसरी लहर में जब जीवन रक्षक दवाओं पर कमाया मुनाफा, ड्रग विभाग के असेसमेंट में सामने आ रही हकीकत

ग्वालियर। कोरोना की दूसरी लहर में शहर के दवा कारोबारी और सर्जिकल सप्लायरों ने जीवन रक्षक दवाओं व सामग्री मरीजों के लिए सप्लाई न करते हुए सीधे डाक्टरों के नाम पर कर दी। सप्लाई रिकार्ड में ऐसा, इसलिए दर्ज किया गया ताकि किल्लत के समय में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके। अब ड्रग विभाग द्वारा की जा रही रिकार्ड की जांच में यह कारनामा सामने आ रहा है। ड्रग इंस्पेक्टर -दिलीप अग्रवाल ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जीवन रक्षक दवाओं की शहर से बाहर सप्लाई किए जाने की जांच कर रहे हैं।

मुरैना के एक डाक्टर को सप्लाई करना पता चला है, सभी बिंदुओं पर पड़ताल कर रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर में शिकायत आई थी कि मास्क की कीमत सर्जिकल पर ज्यादा राशि वसूल की जा रही है। इस शिकायत की जांच की गई तो कीमत ज्यादा वसूलना पाया गया। दरअसल शहर में कम और अंचल के जिलों में डाक्टरों के नाम पर सबसे ज्यादा सप्लाई हुई है। मुरैना के एक डाक्टर के नाम पर जीवन रक्षक दवा फैबिफ्लू आदि सप्लाई करने की जानकारी सामने आ गई है। वहीं रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर भी बड़े पैमाने पर ऐसा किया गया है, यह शंका गहरा गई है।

दूसरे जिलों में ज्यादा हुई सप्लाई: कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में माहौल ऐसा था कि तत्काल दवा कारोबारियों के रिकार्ड की जांच संभव नहीं थी। अब धीरे-धीरे रिकार्ड की जांच में गड़बड़ी सामने आ रही है। ग्वालियर शहर की बजाए ग्वालियर और चंबल संभाग के जिलों में डाक्टरों के नाम पर जीवन रक्षक दवाओं की सप्लाई ज्यादा की गई। ज्ञात रहे कि कोरोना संक्रमण काल की दूसरी लहर में बेड और आक्सीजन को लेकर तो किल्लत हुई ही थी। साथ ही रेमडेसिविर और जीवन रक्षक दवाओं के लिए सबसे ज्यादा हायतौबा मच गई थी।

यही कारण था कि इसकी कालाबाजारी शुरू कर दी गई। एक के बाद एक मामले ऐसे सामने भी आए, जिसमें इन इंजेक्शन और दवाओं की कालाबाजारी की जा रही थी। इसी किल्लत के माहौल में शहर के बड़े दवा कारोबारियों ने भी जीवन रक्षक दवाओं से मुनाफा कमाने के लिए डाक्टरों के नाम पर रिकार्ड बना दिए और सीधे लोगों को बिक्री कर दी। यह फर्जीवाड़ा ड्रग विभाग को प्राथमिक पड़ताल में पता चला है।